7 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पांच साल पहले मंदिर की हुई थी स्थापना, दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं भक्त

विंध्यवासिनी मंदिर के वार्षिक स्थापना दिवस पर हजारों दर्शनार्थियों ने किए दर्शनमंगलवार, शनिवार, रविवार को दर्शन करने लगती है भीड़
less than 1 minute read
Google source verification
Mumbai news

पांच साल पहले मंदिर की हुई थी स्थापना, दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं भक्त

विरार.

विरार पूर्व में विध्यवासिनी धाम ट्रस्ट की तरफ से विंध्यवासिनी माता मंदिर की स्थापना 5 साल पहले किया गया था।
यह मंदिर पूरे महाराष्ट्र में बने विध्यवासिनी माता में से एक मंदिर है। इस मंदिर में मंगलवार, शनिवार, रविवार को दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर में दूर - दूर से भक्तगण दर्शन करने आते है । हर साल की तरह इस साल भी विंध्यवासिनी माता चौकी (कीर्तन ) का 5 वे वर्ष का आयोजन किया गया। इस आयोजन में हजारों की संख्या में दर्शनार्थियों ने माता का दर्शन करके महा प्रसाद ग्रहण किया। इस मंदिर के ट्रस्टी एडवोकेट दिनेश रामनरेश तिवारी ( विंध्यवासिनी धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष ) रेखा दिनेश तिवारी ( उपाध्यक्ष) और स्वेता तिवारी, श्रेया तिवारी, शौर्य तिवारी, सहित उसगांव के उप सरपंच संदीप पाटिल, उसगांव के पूर्व मेंबर बुद्धा जाधव सहित उसगांव के कई ग्राम पंचायत सदस्य उपस्थिति थे। वही समाज सेवक , राजकुमार मिश्रा, एडवोकेट संगीता मिश्रा, एडवोकेट सुरेश तिवारी, सुरेंद्र यादव सहित कई लोगो ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने अपनी उपस्थित दर्ज करवाई । लोगों ने माता का दर्शन किया।


'रिश्तेदारों का साथ नहीं छोड़ेंÓ
मुंबई. जिस स्थान पर जल रहता है,हंस वही रहते हैं। हंस उस स्थान को तुरंत ही छोड़ देते हैं जहां पानी नहीं होता है। हमें हंसों के समान स्वभाव वाला नहीं होना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमें कभी भी अपने मित्रों और रिश्तेदारों का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। जिस प्रकार हंस सूखे तालाब को तुरंत छोड़ देते हैं, इंसान का स्वभाव वैसा नहीं होना चाहिए। यदि तालाब में पानी न हो तो हंस उस स्थान को भी तुरंत छोड़ देते हैं जहां वे वर्षों से रह रहे हैं। उक्त बातें विनय स्वरूपानंद सरस्वती रामानुग्रह आश्रम रायवाला हरिद्वार ने कही।

बड़ी खबरें

View All

मुंबई

महाराष्ट्र न्यूज़

ट्रेंडिंग