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‘कालबादेवी’ की दया से व्यापार में होती है तरक्की

18 वीं सदी में इस क्षेत्र में मूलत: व्यापारी वर्ग रहा करते थे, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, पारसी सभी का था समावेश500 साल पुराना है मंदिर, व्यापारियों की आराध्य देवी

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Mumbai news

‘कालबादेवी’ की दया से व्यापार में होती है तरक्की

मुंबई.

कालबादेवी मंदिर को व्यापारियों का आराध्य कहा जाता है। दक्षिण मुंबई के सबसे ज्यादा हिंदी भाषी आबादी वाले इस कारोबारी क्षेत्र के कालबादेवी मंदिर में हर व्यापारी मत्था टेकता है, जिससे उसके कारोबार में लगातार तरक्की हो। देश के सबसे समृद्ध व्यापार परिसर कालबादेवी में कपड़ा, सोना चांदी से लेकर हर उन वस्तुओं का व्यवसाय होता है जो मानव जीवन के भौतिक जीवन को सुख समृद्धि का द्योतक कहा जाता है। इस लिए भक्त मानते हैं कि यहां आने वाले हर भक्त पर माता की असीम कृपा बरसती है।
कालबादेवी मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना मंदिर है। रघुनाथ कृष्णा जोशी ने सन 1785 में इस मंदिर का निर्माण आजाद मैदान जिसे तब कैम्प मैदान कहा जाता था। ऐसा माना जाता है कि 1803 में एक भीषण आग हादसे के बाद अंग्रेजों ने लोगों को तब बम्बई की सीमा से बाहर बसने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया। उस समय मुंबई में जो अनियोजित बस्तियां थी उनमें कालबादेवी और उसके आस-पास के इलाके भी थे। उसी दरम्यान कालबादेवी मंदिर को कालबादेवी परिसर में स्थान्तरित किया गया। कालबादेवी मंदिर के नाम पर ही क्षेत्र का नाम कालबादेवी पड़ गया। 18 वीं सदी में इस क्षेत्र में मूलत: व्यापारी वर्ग ही रहा करते थे, जिसमें हिंदू-मुस्लिम और पारसी-सभी थे। पुराने समय के गोथिक व भारतीय शैली की इमारतों के बीच में कालबादेवी मंदिर बेहद छोटा सा मंदिर है, जिसमें महाकाली, महालक्ष्मी व राज राजेश्वरी की मूर्तियां हैं, बीच की मूर्ति को ही कालबादेवी कहा जाता है। सभी मूर्तियां स्वयंभू है।
आजादी की लड़ाई का भी गवाह है कालबादेवी मंदिर
कालबादेवी मंदिर आजादी की लड़ाई का भी साक्षात गवाह है। हुतात्मा बाबूगेनू, चाफेकर बंधु व उनके अनेक सहयोगी प्रतिदिन कालबादेवी का दर्शन करते थे। इस मंदिर को हिन्दू टेम्पल आफ बॉम्बे की श्रेणी में भी रखा गया है। कालबादेवी मंदिर का देखभाल रघुनाथ कृष्णा जोशी की सातवीं पीढ़ी के दिनेश जोशी करते हैं। कालबादेवी मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से मार्गशीर्ष आमवस्या के दिन मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है। दिनेश जोशी ने कहा की कालबादेवी व्यापारियों की कुलदेवी हैं इनकी कृपा से व्यापार में वृद्धि होती है।