
श्रावक होने के तात्पर्य पर दिया मार्गदर्शन
भिवंडी. श्रावक जागरिका कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वी अणिमा और साध्वी मंगलप्रज्ञा के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर साध्वी अणिमा ने श्रावक होने का तात्पर्य समझाया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, क्रिया और विवेक के जीवंत रूप का नाम श्रावक है। आचार, व्यवहार और संस्कार के समन्वित रूप का नाम श्रावक है। धर्मसंघ व धर्म गुरु के मंगल साये में भवसागर का किनारा पाने वाली भव्यात्मा का नाम श्रावक है। श्रावक अपने कर्तव्य बोध एवं दायित्व बोध के प्रति सजग बनकर केवल स्वकल्याण ही नहीं बल्कि आने वाली पीढिय़ों को भी पथ प्रदर्शक बन सकता है। प्रत्येक श्रावक अपने घर-परिवार के सदस्यों में धर्मसंघ के प्रति आचार्यों एवं साधु-संतों के प्रति निष्ठा भाव वर्धमान रहे, ऐसा प्रयत्न करना जरूरी है। यह श्रावक जीवन की सार्थकता का प्रथम सोपान बन सकता है। मर्यादा, व्यवस्था और अनुशासन के सुरक्षा परकोटो में संरक्षित हमारा धर्मसंघ हम सबके लिए गण है, शरण है। हम सदैव संघ व संघपति के प्रति सर्वात्मना समर्पित रहकर अपनी साधना, आराधना करें, इसी में आत्मकल्याण सन्निहित है। साध्वी मंगलप्रज्ञा ने कहा कि जिनशासन रूपी रथ के दो मजबूत स्तंभ हैं श्रावक व श्राविका। श्रावक संघ की गौरव वृद्धि में सदैव जागरूक रहे।
श्रद्धा व आस्था का गौरवमय अध्याय लिखकर नया कीर्तिमान बनाए। इस अवसर पर साध्वी कर्णिका, साध्वी समत्वयशा, साध्वी सुधाप्रभा, साध्वी मैत्री प्रभा, प्रकाश बाफना, रोहित बैद, विमल आंचलिया, कुलदीप चोरडिया, सीमा बाफना, मोनिका बाबेल, विनोद सेठिया, ललिता सेठिया, भारती सेठिया, कविता सेठिया आदि
मौजूद रहीं।
Published on:
15 May 2019 05:43 pm
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