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Election News : बिन ‘कप्तान’ के कैसे पार लगेगी भंवर में फंसी कांग्रेस की नैय्या?

Maharastra Election : घर की आग से झुलस रही कांग्रेस (Congress), कद्दावर नेताओं ने किया किनारा राज्य के गठन के बाद से कांग्रेस का रहा एक छत्र राज इस बार दांव पर पार्टी की प्रतिष्ठा (Image) और साख (Creadibility)

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Election News : बिन 'कप्तान' के कैसे पार लगेगी भंवर में फंसी कांग्रेस की नैय्या?

Election News : बिन 'कप्तान' के कैसे पार लगेगी भंवर में फंसी कांग्रेस की नैय्या?

- राजेश कसेरा

मुंबई. महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा देखने को मिलेगा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा और साख दोनों दांव पर लगी है। कहने को भले महाराष्ट्र और मुंबई प्रदेश अध्यक्षों के अलावा कई बड़े पदाधिकारी चुनाव प्रचार में जुटे हैं, लेकिन मजबूत कप्तान नहीं होने से पार्टी एकजुट नजर नहीं आ रही है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुनाव जिताने का जिम्मा वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपा, लेकिन वे भी महाराष्ट्र में पार्टी के अंदर फैली गुटबाजी के आगे बेबस दिखाई दिए। पहले दिग्गज नेता कृपाशंकर सिंह दूर हुए तो चुनाव के ऐनमौके पर दो बार राज्यसभा तो एक बार लोकसभा सांसद रहे संजय निरुपम ने पार्टी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। दोनों ही नेता लंबे समय से महाराष्ट्र में कांग्रेस के परमच को मजबूती से लहराने में संघर्षरत रहे थे, पर विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ने हाथ खींच लिए। निरुपम तो लगातार कह रहे हैं कि कांग्रेस तो चुनाव में चार सीटों से ज्यादा जीत ही नहीं पाएंगी।

इनके अलावा प्रदेश के कई नेता और भी थे, जो बगावत पर उतरने के बाद पार्टी को छोड़कर चले गए। मतदान प्रक्रिया से पहले वरिष्ठ नेताओं की खींचतान ने पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल और आत्मविश्वास को कमजोर करने का काम किया है। ऐसे में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस का महागठबंधन 288 में से कितनी सीटें विधानसभा चुनाव में जीत पाएगा, इसको दमदार तरीके से कहने वाला तो कम से कम कांग्रेस में तो कोई नजर नहीं आ रहा है।

जानें कहां गए वो दिन....


वर्ष 1960 में प्रदेश के गठन के बाद से करीब साढ़े पांच दशक तक कांग्रेस ने प्रदेश में एक छत्र राज किया। हर चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाई। इस दौरान प्रदेश की जनता ने मुख्यमंत्रियों के 23 कार्यकाल देखे, जिनमें 19 बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज रहे। सबसे ज्यादा तीन बार वसंतराव नाईक ने नेृतत्व किया। वे चार हजार 97 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार भी तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उन्होंने दो हजार 413 दिनों तक शासन किया।

राहुल गांधी ने भी बना ली दूरी


लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र के तूफानी दौरे करने वाले पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में किनारा कर लिया। न तो वे यहां पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ाने आए न ही पार्टी के अंदर मचे तूफान को शांत करने का काम किया। उल्टे प्रचार अभियान आरंभ होने से पहले विदेशी दौरे पर चले गए। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 542 में से महज 52 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी थी। राहुल ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद गोवा और तेलंगाना में कांग्रेस के विधायकों के भाजपा और टीअारएस में शामिल हो जाने के बावजूद राहुल चुप्पी साधे रहे। कांग्रेस के प्रति उनकी अचानक अनदेखी ने महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही राज्यों में पार्टी काे गहरे संकट में डाल दिया। ऐसे में विधानसभा चुनाव के नतीजे दोनों राज्यों में कांग्रेस के खिलाफ आएंगे तो कम से कम आश्चर्य तो नहीं होगा।

2014 से लगातार बढ़ रहा है संकट


देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का संकट 2014 से लगातार बढ़ रहा है। मोदी लहर में बही कांग्रेस लगातार कमजोर होती चली गई। केन्द्र और राज्य के चुनावों में हार-दर-हार कांग्रेस का मनोबल कुछ इस तरह से टूट रहा है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को भी लगने लगा है कि इन हालात में पार्टी की जीत की संभावनाएं नहीं के बराबर हैं। कभी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं तो कभी करीबी नेताओं की मनमानी पर।

कितनी बार, किसके मुख्यमंत्री बने


कांग्रेस : 19 बार
शिवसेना : 2 बार
भाजपा : 1 बार
पीडी फ्रंट : 1 बार

सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहे


नाम कितनी बार कितने दिन

वसंतराव नाईक 3 बार 4097 दिन
शरद पवार 3 बार 2413 दिन
विलासराव देशसमुख 2 बार 2681 दिन