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संसद में भारत-पाक तनाव पर चर्चा करना राष्ट्रहित में नहीं, शरद पवार ने कांग्रेस की मांग से किया किनारा

शरद पवार ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और सभी बातों का खुलासा नहीं किया जा सकता। इसलिए सर्वदलीय बैठक बुलाना बेहतर होगा। जबकि कांग्रेस ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 12, 2025

Sharad Pawar journalism Story

शरद पवार

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और उसके बाद युद्धविराम (सीजफायर) पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी (एसपी) सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना सही नहीं होगा। वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है। हालांकि उन्होंने अमेरिका द्वारा की गई मध्यस्थता पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) समेत कई विपक्षी पार्टियां पहलगाम आतंकी हमले और फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद के विभिन्न घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। जबकि पूर्व रक्षा मंत्री पवार ने कहा कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

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'संसद में इस तरह के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती'

मुंबई में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए शरद पवार ने कहा, "मैं संसद का विशेष सत्र बुलाने के खिलाफ नहीं हूं... लेकिन यह एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है और संसद में इस तरह के गंभीर मुद्दे पर चर्चा संभव नहीं है... ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय हित के लिए जानकारी को गोपनीय रखना जरूरी है, इसलिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के बजाय बेहतर होगा कि सर्वदलीय बैठक हो।" 

भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर शरद पवार ने कहा कि अब तक हमने कभी किसी तीसरे पक्ष को अपने घरेलू मुद्दों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमारे आंतरिक मुद्दों के बारे में कुछ कहा है। यह अच्छा नहीं है।

पवार ने शिमला संधि का किया जिक्र, मांगा जवाब

पवार ने कहा कि शिमला संधि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच एक विशिष्ट समझौता है, जिसमें कहा गया है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होगा। शिमला समझौते में यह बात कही गयी है कि दोनों देश आपस में फैसला करेंगे। तो फिर अमेरिका कैसे आ गया, केंद्र सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा 10 मई को सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, इस पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कदा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि यह भारत का आंतरिक मामला है, इसमें ट्रंप की एंट्री क्यों हुई। विपक्षी दलों का दावा है कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के दबाव में सीजफायर किया, जबकि यह पाकिस्तान को सबक सिखाने का अच्छा मौका था।

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित इंडिया ब्लॉक में शामिल अन्य दल केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। जिसमें सीजफायर किन कारणों की वजह से किया गया, इसके बारे में देश को बताया जाए।