
29 साल में डूब जाएगा भारत का मैनहट्टन नरीमन प्वाइंट
मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी में नागरी सुविधाएं मुहैया कराने वाली मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने भयावह आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इससे समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। हालात इशारा कर रहे कि अगले 25-30 साल में दक्षिण मुंबई का 70 प्रतिशत हिस्सा समंदर अपने आगोश में ले लेगा। मंत्रालय, सचिवालय सहित नरीमन प्वाइंट का 80 प्रतिशत हिस्सा डूब जाएगा। बहुमंजिली इमारतों में हजारों दफ्तरों को समेटे नरीमन प्वाइंट को भारत का मैनहट्टन कहा जाता है। राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की मौजूदगी में जलवायु कार्य योजना और इसकी वेबसाइट के उद्घाटन मौके पर चहल ने ये बातें शुक्रवार को कहीं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ पहले से ही जलवायु परिवर्तन के नतीजों से हमें आगाह करते रहे हैं। इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। अब खतरा हमारे दरवाजे पर मंडरा रहा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन इलाकों पर खतरा
बीएमसी आयुक्त ने कहा कि समय-समय पर प्रकृति हमें चेतावनी देती रही है। यदि हम अब भी नहीं संभले तो आने वाले वर्षों में नतीजा भयावह हो सकता है। इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सन 2050 से हम केवल 29 साल दूर हैं। बचाव के इंतजाम नहीं किए तो दक्षिण मुंबई के ए, बी, सी और डी वार्ड का 70 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न हो सकता है। कफ परेड, मरीन लाइंस, गिरगांव, ब्रीच कैंडी जैसे इलाकों का तीन चौथाई हिस्सा पानी में समा जाएगा।
मुंबई पहला शहर
मनपा आयुक्त ने कहा कि हमारे पास समय नहीं है। अभी से तैयारी नहीं की गई तो अगली पीढ़ी की बात ही छोडि़ए मौजूदा पीढ़ी भी इसका खामियाजा भुगतेगी। मुंबई दक्षिण एशिया का पहला शहर है, जिसने जलवायु कार्य योजना न सिर्फ बनाई बल्कि उस पर अमल भी शुरू कर दिया है।
सवा साल में तीन चक्रवात
मनपा आयुक्त ने कहा कि 2020 से पहले 129 साल में मायानगरी से कोई भी चक्रवात नहीं टकराया। सवा साल में तीन चक्रवात आए हैं। पिछले साल पांच अगस्त को नरीमन प्वाइंट पर पांच-साढ़े पांच फुट पानी भर गया था। इसी साल 17 मई को ताउते चक्रवात आया था। तूफानी हवा के साथ 214 मिमी बारिश महानगर में हुई। यह सब खतरे का संकेत है।
बारिश चक्र में बदलाव
उन्होंने कहा कि मुंबई में बारिश का चक्र बदला है। महीने में दो-तीन दिन भारी बारिश हो रही है। जुलाई में 16 को 235 मिमी तो 18 को 253 मिमी बारिश दर्ज की गई। इतना ही नहीं 17 से 20 जुलाई के बीच पूरे महीने की 70 प्रतिशत बारिश रेकॉर्ड की गई। हमारे लिए चुनौती यह कि कुछ घंटे ही भारी बारिश होती है। पानी निकासी की सुविधाएं कम पड़ जाती हैं। इससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।
Published on:
28 Aug 2021 08:24 pm
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