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सेना में भर्ती हुआ बेटा कभी घर नहीं लौटा… 13 साल से महाराष्ट्र के बुजुर्ग मां-बाप कर रहे तलाश!

Army jawan Mother Father Protest: छत्रपति संभाजीनगर जिले के सोयगाव तालुका के मालेगाव पिंपरी के रवींद्र भागवत पाटिल 2005 में भारतीय सेना में शामिल हुए। 2010 से वह अचानक लापता हो गए।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 20, 2023

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कहां गायब हो गए आर्मी जवान रवींद्र पाटिल? अनशन पर बैठे बूढ़े माता-पिता

Indian Army Jawan Ravindra Patil: महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर (Aurangabad) जिले से दिल को झकझोर देने वाला वाकिया सामने आया है। जहां एक बूढ़े मां-बाप पिछले 13 साल से अपने लाडले के घर लौटने का इंतजार कर रहा है। बताया जा रहा है कि देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती हुआ बेटा साल 2010 से लापता है। वर्षों तक खोजबीन करने के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं लगा तो अब थक हारकर जवान के बुजुर्ग माता-पिता संभाजीनगर में भूख हड़ताल कर रहे है।

जानकारी के मुताबिक, किसान माता-पिता अपने बेटे को खोजने के लिए हर जगह गए लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। जिसके बाद जवान के माता-पिता उसे ढूंढ़ने की मांग को लेकर छत्रपति संभाजीनगर शहर में कलेक्टर कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। यह भी पढ़े-त्र्यंबकेश्वर विवाद में राज ठाकरे की एंट्री, कहा- इतना कमजोर नहीं है हिंदू धर्म, कायम रहे परंपरा


ड्यूटी के दौरान अनहोनी की आशंका

छत्रपति संभाजीनगर जिले के सोयगाव तालुका के मालेगाव पिंपरी के रवींद्र भागवत पाटिल 2005 में भारतीय सेना में शामिल हुए। रवींद्र के पिता भागवत और मां बेबाबाई इस बात से बहुत खुश नहीं थे कि उनका अपना बेटा सेना में शामिल हो कर देश की सेवा कर रहा है। कहा जा रहा है कि 2005 से 2010 तक रवींद्र सेना में शामिल होने के बाद अपने माता-पिता के संपर्क में थे। लेकिन फिर वें अचानक लापता हो गए।

सेना कार्यालय में भी नहीं मिली जानकारी

लापता जवान रवींद्र के पिता भागवत पाटिल का कहना है कि 2010 के बाद से उनके बेटे का कुछ पता नहीं चला और वह तब से गायब हो गया है। रवींद्र ने अपने माता-पिता से भी संपर्क नहीं किया है। अब बूढ़े हो चुके भागवत ने कई बार सेना कार्यालय से संपर्क किया और अपने बेटे की जानकारी चाही। हालाँकि, उन्हें वहां भी निराशा हाथ लगी।


कई राज्यों में तलाश की

खेती करने वाले भागवत पाटिल ने कहा, 'बेटे का पता नहीं चल रहा था, इसलिए हमने उसका पता लगाने के लिए विभिन्न राज्यों में गए और उसकी तलाश की। आर्थिक स्थिति खराब होने और अधिक उम्र के बावजूद हम खुद कई जगह गए और बेटे को खोजा। हम अपने बच्चे को खोजने की लगातार कोशिश कर रहे है। लेकिन अभी तक उसका पता नहीं चल पाया है।

पैसे कम पड़े तो खेत बेच दिया

बुजुर्ग किसान ने बताया कि बेटे की तलाशी अभियान में पैसे कम पड़े तो उन्होंने अपना दो एकड़ खेत बेच दिया। इस वजह से उनसे दूसरे बेटे का परिवार भी खफा हो गया हैं। भागवत ने कहा, वे (दूसरा बेटा व उसकी पत्नी) कहते हैं कि आपने हमारे खेत भी गंवा दिए। फिर भी हमने अपने बेटे की हर जगह तलाश की। लेकिन हमें अपने बेटे के बारे में किसी से कोई जवाब नहीं मिला। इसी के चलते अब हम (पति और पत्नी) कलेक्टर कार्यालय के सामने आमरण अनशन कर रहे हैं। उन्होंने ड्यूटी के दौरान बेटे रवींद्र के साथ अनहोनी की आशंका जताई है और केंद्र सरकार व राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई है।

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