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patrika social pride : आध्यात्मिक एवं सामाजिक उत्थान को तत्पर जैन सोशल ग्रुप

घोडबंदर रोड ठाणे का महिला मंडल

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मुंबई

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Binod Pandey

Jul 06, 2019

patrika mumbai

patrika social pride : आध्यात्मिक एवं सामाजिक उत्थान को तत्पर जैन सोशल ग्रुप

धर्मेन्द्र उपाध्याय
ठाणे. मानव सेवा ही समाज सेवा है। इसी से आत्मिक विकास के सभी दरवाजे खुल जाते हैं। ठाणे-घोडबंदर रोड का जैन सोशल ग्रुप का महिला मंडल भगवान महावीर के अहिंसा परमो धर्म एवं जीयो और जीने दो का पालन करता हुआ मंडल अपनी प्रगति की ओर अग्रसर है। अपनी स्वयं की आत्मा को निर्मल बनाने के लिए महिला मंडल सामायिक व्रत की सामूहिक आराधना करता है और फिर अगला अभियान होता है। मानव सेवा, समाज सेवा या प्राणी मात्र की सेवा। सेवा के साथ साथ मंडल अपनी पुरातन राजस्थानी संस्कृति और रीति रिवाज को भी सहेजकर रखने का अच्छा प्रयास कर रहा है, जिसकी झलक दशामाता पर्व पर देखने को मिलती है। पारंपरिक राजस्थानी पहनावे से लेकर अन्य सभी आयोजनों मे संपूर्ण राजस्थान दिखाई देता है जो वर्ष भर याद रहता है। संगठन के रूप में मंडल एक और एक ग्यारह की कहावत को चरितार्थ करता है, राजस्थान के दूर-दूर के कई कजिलों की बहनों का एक अनूठा संगठन है यह मंडल। इंदिरा गोखरू, कांता चोरडिया, रविना खमेसरा, प्रिया कुमठ, पारुल कुमठ, पिंकी कुमठ, सुशीला आंचलिया, पिंकी हींगड,अनीता पामेचा, इंदु सांखला, नीलम आंचलिया, अनीता हींगड, सुनीता चोरडिया, रेखा सिंघवी, मंजू कोठारी, अंकिता खमेसरा, मंजू बोरदिया,हर्षा बोरदिया,किरण वया,निशा सुराणा, मोना जैन, रीना चोरडिया, राखी हींगड, टीना जैन,कल्पना डांगी,उज्वला सांखला, सुशीला कोठारी, साधना चपलोत, सुनीता कुमठ सहित अन्य सभी महिला सदस्याएं सक्रिय रूप से मंडल में सेवा रत हैं।

संगठन में ही शक्ति है। एक धागे को हर कोई तोड़ सकता है, लेकिन ऐसे कई धागे मिलकर बड़ी रस्सी का रूप ले लेती है तो वह रस्सी हाथी तक को बाधने में सक्षम हो जाती है।हमारा यह मंडल संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहा है। संगठन के बिना कोई भी समाज प्रगति नही कर सकता है।

रवीना खमेशरा



जैन सोशल ग्रुप यह एक बहुत ही अकल्पनीय सामाजिक संगठन है। यह ग्रुप हमारे जैन में जैन समाज की एकता का प्रतीक है।मुंबई जैसे मेट्रो शहर में रहते हुए भी हम ऐसे संगठन का हिस्सा है। जिसपर हमे गर्व है की हमारे आनेवाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

मोनिका सांखला

सनातन संस्कृति एक अमूल्य धरोहर है, जो हमें सहज ही मिली है। ऐसी संस्कृति को सहेज कर रखना हमारा कर्तव्य और दायित्व है। हम सभी बहनें भौतिकता के माहौल में
भी अपनी इस संस्कृति को बचाने के लिए प्रयत्नशील है।

रेखा श्रीश्रीमाल