
पानी केे लिए कुंए पर जमा लोग
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. मानसून अभी बहुत दूर दिख रहा है। मुंबई के लोग गर्मी से बेहाल हैं, शहर के कई इलाकों में पानी की अनियमित सप्लाई की शिकायत लोग कर रहे हैं। मुंबई में पानी की आपूर्ति करनेवाले तालाबों में पिछले वर्ष के मुकाबले कम पानी ही बचा है। मनपा प्रशासन लोगों को घबराने से मना कर रहा है, दावा है कि जुलाई अंत तक मुंबई में पानी की किल्लत नहीं होगी। भीषण गर्मी से जलाशय सूखते जा रहे हैं, प्रशासन यह मान रहा है कि मानसून देरी से आ रहा है पर वह इसके मुकाबले को तैयार है। पिछले वर्ष मुंबई और आस-पास के क्षेत्रों में कम बरसात हुई। इसकी वजह से मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सातों तालाबों में 25 प्रतिशत कम पानी जमा हुआ। बीएमसी प्रशासन ने दिसंबर के शुरू से 10 प्रतिशत पानी की कटौती शुरू कर दी थी, जो अभी तक जारी है। शहर के कई क्षेत्रों में पानी की अनियमित आपूर्ति की शिकायतें आ रही हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले तालाबों में पानी 14 प्रतिशत कम है। पर राज्य सरकार ने भातसा और अपर वैतरणा तालाब में रिजर्व रखे गए पानी का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। इसी आधार पर मनपा कह रही है कि मुंबई के लोगों को जुलाई माह तक पानी की कोई समस्या नहीं होगी। पर मुंबई के आसपास के ठाणे, कल्याण डोंबीवली, पालघर, नवी मुंबई, मीरा भायंदर, भिवंडी जैसी महानगर पालिकाओं में रहने वाले लोगों को पानी को लेकर समस्याओं का समाना करना पड़ रहा है। मानसून की देरी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं।
सूखे कुएं को बारिश का इंतजार
पालघर. इस बार मानसून देरी से पहुंचने के कारण जिले में भीषण गर्मी और बढ़ते पारे ने पानी की समस्या पैदा कर दी है। जिले भर में इन दिनों पानी की किल्लत देखी जा रही है। पालघर जिले के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर कुएं, नदी, चकडैम और तालाब सूख गए हैं। आदिवासी, ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात यहां तक पहुच गए कि लोगों को कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर प्यास बुझानी पड़ रही है। इस महगांई में लोगों को पानी खरीदना किसी चुनौती से कम नहीं है। वही टैंकर माफिया लोगों को दुगने दामों पर दूषित पानी की सप्लाई कर रहे हैं। शहरी भागों की बात करें तो वर्तमान में वसई-विरार मनपा के सामने जलापूर्ति एक बड़ी समस्या के रूप में देखी जा रही है। लोगों को बेसब्री से बारिश का इंतजार है।
वसई विरार. मनपा क्षेत्र के झोपड़पट्टी इलाकों में भी लोगों की हालत बदतर है। नालासोपारा पूर्व के धानिव बाग, वाकनपाडा, नवजीवन, सातीवली, भोयदापाडा, वसई फाटा, कामण, चिंचोटी, विरार पूर्व के चन्दनसार, कातकरी पाडा, भाटपाडा, विरार फाटा, हाइवे आदि इलाकों में कुएं व बोरिंग का पानी सूख गया है। यहां के लोग मनपा की पाइप के लीकेज पानी से अपनी प्यास बुझा रही है। जिले में ग्रामीण बाहुल्य क्षेत्र काफी बड़ा है। जहां ज्यादातर आदिवासी लोग रहते हैं और जीवन खेती बाड़ी पर निर्भर हैं। लेकिन मई और जून के महीनें की भीषण गर्मी ने गांव के लोगों के आखों से आंसू निकलवा दिए है। जव्हार, मोखाडा, वाडा, तलासरी, दहाणू, कासा, आदि क्षेत्रों में भीषण गर्मी से कुएं, तालाब, नदी, झरने और चैकडैम सब सूख गए हैं। इन इलाकों में तो अप्रेल से पानी की किल्लत शुरू हो गई थी। यहां की महिलाओं को सुबह उठकर दो से तीन किमी दूर जाकर पानी लाना पड़ता है।
आश्वस्त रहे, नहीं होगी दिक्कत
गर्मियों के सीजन का कोई खास प्रभाव नही पड़ेगा, अगले 15 दिनों तक यथास्थिति में मनपा क्षेत्र में पानी सप्लाई जारी रहेगी। करीब 230 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। डेम में जनता के लिए पर्याप्त पानी है।
-- महादेव जवादे, शहर अभियंता, वसई विरार शहर महानगर पालिका
पानी की पर्याप्त व्यवस्था
मनपा क्षेत्र में करीब 40 लाख जनता रहती हैं, अभी हमारे पास पर्याप्त पानी हैं। मानसून देरी से आना समस्या हैं, लेकिन हमने पानी का पूरा बंदोबस्त किया हैं। जनता को पानी के लिए समस्या नही होगी।
किशोर गवस, उपायुक्त, वसई विरार शहर महानगर पालिका
27 गांव के लोग परेशान
कल्याण. कल्याण- डोम्बिवली महानगर पालिका क्षेत्र में कई जगहों पर पानी की किल्लत है। शहर के रोहिदासवाड़ा, टिटवाला, बन्दरपाड़ा के अलावा मनपा के अधीन आने वाले 27 गांव के कुछ भाग में भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। पालिका प्रशासन उल्हासनदी और मोहने उदनचन केंद्र के माध्यम से आपूर्ति करने का भरपूर प्रयास कर रही है लेकिन शहर के ग्रामीण भाग में आज भी पानी की किल्लत है। कल्याण-डोम्बिवली महानगर पालिका प्रशासन पहले से ही प्रत्येक मंगलवार को पानी कटौती कर रही है। पानी की किल्लत को देखते हुए अब महीने में पांच दिन पानी काटा जाएगा। मनपा के जनसंपर्क अधिकारी प्रसाद ठाकुर ने कहा कि अब हर महीने के पहले शनिवार को भी पानी कटौती की जाएगी। इस तरह महीने भर में चार मंगलवार और सुरुआत के पहले शनिवार को मिलाकर हर माह 5 दिन पानी की किल्लत कल्याणवासियों को झेलनी पड़ेगी। पानी नियोजन के लिए पूरे राज्य में पानी की कटौती की जा रही है बरसात में यह समस्या नही रहेगी।
मीरा भायंदर में गहराता जल संकट
मीरा भायंदर. यहां पानी की समस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर को 30 से 40 घंटे में एक बार पानी की सप्लाई होती है। मीरा भायंदर शहर को एमआईडीसी और स्टेम से पानी आपूर्ति की जाती है सप्ताह के प्रति गुरुवार की रात से यह सप्लाई बंद हो जाती है और शनिवार की सुबह शुरू होती है वो भी कम दबाव के साथ। उसपर मनपा ने नए कनेक्शन शुरू कर दिए है जो कि आनेवाले दिनों में मुसीबत बन सकते है, राजस्व जमा करने के नजरिए से नए कनेक्शन लाभदायी है पर नए कनेक्शनों को पानी कहां से देंगे यह सवाल मनपा अधिकारी दबी जुंबा में ही सही पर उठा रहे है।शहर की बढ़ती आबादी के बावजूद मनपा ने शहर के कुदरती पानी के संसाधनों की अनदेखी की है, जबकि शहर में पानी जमा करने के कुदरती संसाधन हैं। जानकारों कि माने तो शहर में बने व्यवसायिक ठिकानों को मनपा पानी दे कर आमजनमानस को प्यासा रख रही है।
लगातार बैठकों का दौर शुरू
ठाणे. जिले में पानी की समस्या को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। पालक मंत्री एकनाथ शिंदे ने अधिकारियों को आगाह करते हुए सभी जरूरी कदम के लिए तैयार रहने को कहा है। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में शहापुर और मुरबाड तहसील में शुरू पानी संकट और इसे मात देने के लिए कई उपाययोजनाओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। पालकमंत्री शिंदे ने कहा कि जल संकट के समय दुर्गम भागों में रहने वाले लोगों तक पानी आपूर्ति कर उन्हें सांत्वना देने की जरूरत है। इसके लिए सरकारी तंत्र किसी तरह की लापरवाही न करें। इस दौरान भातसा जलाशय के बगल में स्थित नहर से पानी छोडऩे, जलाशयों से कीचड़ निकालने, टैंकर से जलापूर्ति करने से पूर्व पानी को भरते समय उसमें पंप बिठाने आदि पर अमल करने का निर्देश दिया गया।
भिवंडी. आबादी के मुताबिक भिवंडी मनपा क्षेत्र में कुल 150 एमएलडी पेयजल की आवश्यकता है। लेकिन सिर्फ 115 एमएलडी ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। जिसमें 73 एमएलडी पानी स्टेम कंपनी, 40 एमएलडी मुंबई मनपा एवं दो एमएलडी पानी वराला तालाब से आपूर्ति होता है। लेकिन पिछले साल मानसून में बारिश कम होने का कारण बताकर स्टेम कंपनी द्वारा 20 फीसदी तथा मुंबई मनपा द्वारा 10 फीसदी कुल मिलाकर 30 फीसदी पानी की कटौती आज तक जारी है। मनपा जलापूर्ति विभाग के अभियंता और प्रभारी शहर अभियंता लक्ष्मण गायकवाड् ने बताया कि विलंब से आने वाले मानसून के मद्देनजर दो-तीन दिन के भीतर राज्य सिंचाई विभाग की बैठक होने वाली है। उसी बैठक में पानी की कटौती की मात्रा को लेकर नियोजन होगा।
उल्हासनगर में होगी पानी की विकराल समस्या
उल्हासनगर. आगामी कुछ दिनों में उल्हासनगर क्षेत्र में पानी की विकराल समस्या हो सकती है। सभी की टकटकी मानसून पर है, यदि इस साल मानसून कमजोर हुआ तो समस्या से निपटने के लिए मनपा प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ेगी, चिंता की बात है कि प्रशासन अभी तैयार नहीं है।
उल्हासनगर को एमआईडीसी की तरफ से मात्र 120 एमएलडी जलापूर्ति की जाती है, जो कि जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम है। हालत यह है कि पारा 45 डिग्री तक जाने के बावजूद जनता को जरूरत से कम पानी मिल रहा है। सात दशक बीत जाने के बाद भी मिलिट्री कैंप की पाइप लाइनों से जलापूर्ति की जाती है, ये पाइप लाइनें जमीन के अंदर सड़-गल चुकी हैं, जिस कारण ढेर सारा पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अंडर ग्राउंड वाटर स्टोरेज टैंक अभी बनने शुरू हुए हैं। अगर वे जल्द नहीं बनें तो उल्हासनगरवासियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। शहरवासी डरे हुए हैं कि तीन वर्ष पहले जैसा मंजर न हो, जब एक एक सप्ताह तक पानी की बूंद भी नहीं दी जा रही थी। लोग निजी टैंकर या मिनरल वाटर खरीदकर पानी का उपयोग करने लगे थे।
प्रशासन टालमटोल की स्थिति में
जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता सीजी सोनवणे से जब यह पूछा गया कि एमआईडीसी से जो पानी लिया जाता है उसकी नाप का मीटर खऱाब हो गया है तो कैसे पता चलता है कि 120 एमएलडी पानी मिला है, इसपर उन्होंने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि इस बारे में आयुक्त से बात करिए। टूटी फूटी लाइनों पर उनका जवाब था कि मनपा सदन में प्रस्ताव लाकर ही इस पर काम शुरू किया जा सकता है। जब मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मात्र दो दिन हुए हैं ड्यूटी ज्वाइन किए हुए, इसलिए इसकी स्टडी कर जवाब देंगे।
Published on:
07 Jun 2019 02:25 pm
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