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मजदूर की बेटी बनेगी एमबीबीएस डॉक्टर, 5 और गरीब छात्रों ने पास किया नीट

चंद्रपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के छात्रों की 'पहल' का कमाल  

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11-12वीं के होनहार छात्रों को मुफ्त पढ़ाते हैं

11-12वीं के होनहार छात्रों को मुफ्त पढ़ाते हैं

नागपुर. हिजाब को लेकर विवाद के बीच महाराष्ट्र के विदर्भ से अच्छी खबर है। गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले चंद्रपुर जिले के पांच होनहार छात्र डॉक्टर बनेंगे। नीट (2021) पास करने के बाद मेडिकल कॉलेजों में इन्हें दाखिला मिल गया है। इनमें से तीन एमबीबीएस व दो पशु चिकित्सा कॉलेजों में पढ़ाई करेंगे। इनमें स्नेहा वाघमारे भी शामिल हैं। मजदूर की बेटी वाघमारे एमबीबीएस कर रही है। ये छात्र डॉक्टर तो बनना चाहते थे, मगर गरीबी आड़े आ रही थी। महंगी कोचिंग के लिए इनके पास पैसे नहीं थे। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, चंद्रपुर में पढ़ाई कर रहे भावी डॉक्टरों ने तीन साल पूर्व 'पहल-रास्ता उम्मीद का' के जरिए इन बच्चों के सपने को पूरा करने का बीड़ा उठाया। 'पहल' में मुफ्त कोचिंग होती है। मेडिकल कॉलेज के छात्र इन्हें बॉयोलॉजी सहित अन्य विषयों को गहराई से पढ़ाते हैं। नीट में पूछे जाने वाले सवालों को समझने-हल करने का तरीका समझाते हैं। 2020 में एक छात्र नीट में पास हुआ था। इस साल छह छात्रों को सफलता मिली है। इनमें एक को डी फार्मा में प्रवेश मिला है। आगे बेहतर नतीजे की उम्मीद है।

प्रवेश परीक्षा से चयन
भावी डॉक्टरों की 'पहल' को आसपास के स्कूल-कॉलेज का अच्छा समर्थन मिला है। मुफ्त कोचिंग के लिए प्रवेश परीक्षा ली जाती है। इसके बाद 25 से 30 छात्र चुने जाते हैं। गरीब और मजदूरों के बच्चे ही इसमें शामिल किए जाते हैं। छात्रों को किताबें भी मुफ्त मिलती हैं। पिछले साल कुलदीप रामटेके ने नीट परीक्षा पास की थी। रामटेके चंद्रुपर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं।

एमबीबीएस में दाखिला
वाघमारे को अंबेजोगाई गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला है। शिवम झाडे को चंद्रपुर मेडिकल कॉलेज तो स्वयम कुमरे को सेवाग्राम के महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में प्रवेश मिला है। जयेश झाडे व रोशन को पशु चिकित्सा संस्थान में एडमिशन मिला है।

कहां से लाते लाखों रुपए
स्नेहा वाघमारे ने कहा कि 'पहल' से मेरा सपना पूरा हुआ है। पिता मजदूरी करते हैं। मां गृहणी हैं। ऐसे में कोचिंग क्लास के बारे में मैं सोच भी नहीं सकती थी। कहां से लाते लाखों रुपए। मेरी कामयाबी से परिवार ही नहीं पूरा गांव खुश है। मेरे गांव में डॉक्टर नहीं हैं। बीमार होने पर इलाज के लिए दूर जाना होता है।