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गोल्डन टेंपल और पश्चिम एक्सप्रेस ट्रेन में हुई लूट,चलती ट्रेन से लाखों के पार्सल गायब

संबंधित माल डिब्बे की सुरक्षा का जिम्मा आरपीएफ के कंधों पर था, घटना पर पर आरपीएफ साध गई चुप्पी...

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(मुंबई): माना यही जाता है कि ट्रेन के जरिए पार्सल भेजना न सिर्फ सुरक्षित होता है बल्कि लागत भी कम बैठती है। लेकिन मुंबई से पंजाब जाने वाली गोल्डन टेंपल और पश्चिम एक्सप्रेस ट्रेन से गायब हुए लाखों रुपए के पार्सल को देखते हुए आम लोगों की यह सोच बदल सकती है। चिंताजनक यह कि माल डिब्बे में सील बंद कर भेजा गया पार्सल चलती ट्रेन में चोरी हुआ है। पार्सल की यह चोरी एक दिन नहीं बल्कि लगातार पांच दिन हुई है। बावजूद इसके रेलवे पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। माल डिब्बे में रखे पार्सल की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की होती है।


मिली जानकारी अनुसार दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से 23 दिसंबर को गोल्डन टेंपल के माल डिब्बे में अमित रेल कार्गो ने लगभग एक लाख रुपए का सामान लोड किया था। यह पार्सल मुंबई सेंट्रल स्थित रफीम रेल पार्सल सर्विस को मिलना था। अगले दिन ट्रेन मुंबई सेेंट्रल पहुंची, तब रफीम रेल पार्सल सर्विस के कर्मचारी सामान उतारने गए। उन्हें पता चला कि पार्सल का सील टूटा हुआ है और अंदर रखे सामान गायब हैं। इसकी सूचना आरपीएफ और जीआरपी को दी गई। आरपीएफ ने चोरी की रिपोर्ट बना कर दे दी। इसके बाद रफीक अहमद शेख ने इसकी शिकायत जीआरपी में दर्ज कराई।

सप्ताह में पांच दिन चोरी

रफीक ने बताया कि 23 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच पांच दिन चलती ट्रेन से पार्सल चोरी हुए हैं। लेकिन अभी तक शिकायत सिर्फ एक ही ली गई। रफीक ने बताया कि 23 दिसंबर को हुई चोरी का मामला जीआरपी ने 24 को दर्ज किया। लेकिन 29 और 30 दिसंबर को हुई चोरी की शिकायत अभी तक नहीं ली गई है। उन्होंने बताया कि ट्रेन में सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की है।

आरपीएफ की लापरवाही

जिस डिब्बे में चोरी हुई है वह पार्सल डिब्बा इंजन के ठीक पीछे और जनरल बोगी के आगे लगता है। पार्सल डिब्बे में सामान भरने के बाद इसे आरपीएफ सील करता है। इसके बाद हर स्टेशन पर इसे चेक भी किया जाता है। इसके बावजूद माल डिब्बे का सील तोड़ कर अंदर रखे सामान चोरी हो गए। पार्सल की सुरक्षा के लिए एक आरपीएफ जवान ट्रेन में चलता है। बड़ा सवाल यह कि जब हर स्टेशन पर आरपीएफ ने पार्सल यान को चेक किया और ट्रेन में आरपीएफ जवान तैनात था तो फिर यह चोरी कैसे हुई? ऐसे तमाम सवाल हैं, पर आरपीएफ के पास जवाब नहीं है। अपनी जान बचाने के लिए आरपीएफ इसकी जिम्मेदारी जीआरपी पर डाल रही है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
अनूप शुक्ला, सीनियर डीएससी आरपीएफ

हर महीने ऐसी घटनाएं होती हैं। 23 से 30 दिसंबर के बीच पांच चोरी की घटनाएं हुईं, मगर जीआरपी ने सिर्फ एक की शिकायत ली है। जीआरपी और आरपीएफ कहते हैं कि हमारा सिर्फ यही काम नहीं है। सवाल यह है कि अगर सुरक्षा नहीं मिलेगी तो किसके भरोसे पार्सल भेजा जाए या मंगाया जाए।

रफीक अहमद शेख, शिकायतकर्ता