
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: X/@Dev_Fadnavis @mieknathshinde)
महाराष्ट्र में हुए महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी ने भले ही बड़ी जीत दर्ज की हो, लेकिन कई शहरों में मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। ज्यादातर जगहों पर भाजपा सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसे अकेले बहुमत नहीं मिला है। यही वजह है कि सत्ता गठन और मेयर चुनाव को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। इस बीच, सत्तारूढ़ महायुति में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने बड़ा दांव चल दिया है। जिससे बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है।
ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के टिकट पर चुने गए दो पार्षदों ने शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है, जिससे नगर निगम में सत्ता गठन की बीजेपी की कोशिश फेल होती दिख रही है।
गौर हो कि प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने महानगरपालिका चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ा था।
उल्हासनगर नगर निगम (महानगरपालिका) के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए है। वंचित बहुजन आघाड़ी के दो नवनिर्वाचित पार्षदों ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दे दिया है। इस एक कदम ने नगर निगम में शिवसेना का रास्ता साफ कर दिया है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को सत्ता से दूर कर दिया है।
उल्हासनगर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से वह महज 3 कदम दूर रह गई। दूसरी ओर, 36 सीटें जीतने वाली शिवसेना ने अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत की। शिवसेना को पहले ही अपने सहयोगी 'साई पार्टी' (SAI Party) के एक पार्षद और एक निर्दलीय का समर्थन मिल चुका था, जिससे उनकी संख्या 38 पहुंच गई थी। अब वंचित बहुजन आघाड़ी के दो और पार्षदों का समर्थन मिलने के बाद शिवसेना का आंकड़ा 40 पर पहुंच गया है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है।
वंचित बहुजन आघाड़ी की पार्षद सुरेखा सोनावणे (Surekha Sonawane) और विकास खरात (Vikas Kharat) ने मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आवास पर मुलाकात की और औपचारिक रूप से अपना समर्थन पत्र सौंपा। इस दौरान कल्याण लोकसभा सांसद व एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे, विधायक बालाजी किणीकर भी मौजूद थे।
समर्थन देने वाले पार्षदों का कहना है कि उन्होंने यह फैसला अपने वार्डों के विकास को ध्यान में रखकर लिया है। उन्होंने विशेष रूप से दलित बस्ती सुधार योजना और स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए शिंदे सेना का साथ देने की बात कही।
बीजेपी ने UMC चुनाव अकेले लड़ा था और 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से वह कुछ कदम दूर रह गई। सत्ता पर दावा पेश करने के लिए बीजेपी को कम से कम तीन और पार्षदों के समर्थन की जरूरत थी। इसलिए उल्हासनगर महानगरपालिका की सत्ता पाने के लिए बीजेपी खूब जोर भर रही थी और अन्य पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शिंदे ने पूरा गेम पलट दिया। यह बीजेपी के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
Updated on:
19 Jan 2026 01:51 pm
Published on:
19 Jan 2026 01:33 pm
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