
Maha politics: सियासी संकट: राज्यपाल ने साधी चुप्पी, उद्धव ने की पीएम मोदी से बात. विधान परिषद में मुख्यमंत्री का मनोनयन होगा या नहीं?
मुंबई. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का मनोनयन विधान परिषद में करेंगे या नहीं, यह सवाल अभी भी कायम है। सियासी संकट के समाधान के लिए राजभवन पहुचें राज्य के कैबिनेट मंत्रियों को कोई आश्वासन नहीं मिला है। कैबिनेट के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है। राजभवन की चुप्पी पर सत्ताधारी महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस नेताओं की धड़कने तेज हो गई हैं। कोरोना की रोकथाम में जुटे मुख्यमंत्री का मनोनयन विधान परिषद में होगा या नही, फिलहाल सियासी गलियारों में यही सबसे बड़ा सवाल है। फैसला राज्यपाल को करना है, जो मौन साधे हैं। सियासी संकट के समाधान के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। सूत्रों के अनुसार कोरोना की रोकथाम से जुड़े उपायों की जानकारी साझा करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने राजनीतिक संकट के समाधान का अनुरोध भी प्रधानमंत्री से किया।
उल्लेखनीय है कि राज्य मंत्रिमंडल ने सोमवार को विधान परिषद में राज्यपाल कोटे की खाली दो सीटों में से एक पर उद्धव के मनोनयन की सिफारिश दोबारा राजभवन भेजी है। इसी सिलसिले में उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व में कैबिनेट मंत्रियों ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात की। लेकिन, राजभवन से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्धव सरकार गिर सकती है। चर्चा तो यहां तक होने लगी है कि उद्धव के इस्तीफे के बाद राज्य का नया मुख्यमंत्री कौन होगा।
यहां फंसा है पेच
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विधान मंडल के दोनों सदनों में से किसी के भी सदस्य नहीं हैं। 28 मई को उन्होंने शपथ ली थी। नियमानुसार शपथ ग्रहण के छह माह के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होगी। कोरोना संकट के मद्देनजर चुनाव आयाग ने सभी चुनाव टाल दिए हैं। ऐसे में एक ही रास्ता बचा है कि राज्यपाल विधान परिषद में उद्धव को मनोनीत कर दें। 28 मई से पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।
Published on:
29 Apr 2020 11:46 pm
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