
maha: 13 वर्ष पहले अलग हुए ठाकरे बंधुओं को एकत्र आने की आश जगी
मुंबई। बचपन में एक साथ पले -बढ़े , खेले -कूदे , और राजनीतिक करियर की शुरुवात करने वाले ठाकरे भाई पिछले तेरह वर्षों के बाद अब एक बार फिर साथ आते दिख रहे हैं .मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे को (प्रवर्तन निदेशालय ) ईडी का नोटीस क्या मिला कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भाई की याद आ गई . अपने चचेरे भाई के बचाव में उतरते हुए उद्धव ने अपनी सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया .उद्धव ठाकरे ने राज को एक प्रकार से निर्दोष होने का प्रमाण देते हुए कहा की इस मामले में कुछ होने वाला नहीं है . जांच में भी ईडी को कुछ हासिल नहीं होगा .
उद्धव ठाकरे ने बुधवार को पत्रकारों के साथ बात चीत में कहा कि राज ठाकरे को दी गई ईडी के नोटीस का महत्त्व नहीं है . इस मामले में कोई तथ्य नहीं है . ईडी भले पुरे मामले की जांच कर ले लेकिन उसके हाथ में कुछ नहीं आने वाला है .मोदी सरकार पर कोई भी टिपण्णी करने से बचाते हुए उद्धव ने साफ़ किया कि इसमे सरकार का कितना रोल है यह कहना मुश्किल है . लेकिन इतना साफ़ है कि ईडी को खाली हाथ लौटना पड़ेगा .
पिछले 13 वर्षों में पहली बार उद्धव राज के लिए खड़े हुए, दोनों भाई 13 वर्ष पहले अलग हुए हैं . शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की जगह लेने के लिए दोनों भाइयों में शुरू वर्चस्व में उद्धव को जीत मिली थी . बाला साहेब ने उद्धव को पार्टी की कमान सौपी थी . जिससे नाराज होकर राज ठाकरे ने अपनी नई पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया . तबसे लेकर दो बार लोकसभा और दो बार विधानसभा चुनाव में दोनों भाई एक दुसरे के खिलाफ जम कर लड़ चुके हैं .शिवसेना को शुरुवात में मनसे के बढ़त के चलते काफी नुकसान भी हुआ था लेकिन बाद में भाजपा के साथ शिवसेना के गठबंधन ने उसे बचा लिया . शिवसेना ने मनसे को काफी पीछे छोड़ दिया .कभी 13 विधायक और कई महानगर पालिका में सत्ता हासिल करने वाली मनसे के पास आज कार्यकर्ता भी नहीं बचे हैं .
राज ठाकरे ने चार वर्ष पहले हुए उद्धव ठाकरे के हार्ट सर्जरी के समय उद्धव से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया था . उसके बाद एक बार फिर राज ने अपने बेटे के शादी का न्योता देने उद्धव के घर गए थे . लेकिन इन्ही सब छोटे छोटे कारणों से दोनों भाई के बीच रिश्ते जिन्दा रहे . बीच बीच में दोनों दलों के कार्यकर्ता दोनों भाइयों के मिलन की अपेक्षा भी करते हैं . और तरह तरह के मन्नते भी मंगाते हैं .
उधर कांग्रेस ने ईडी के इस कदम पर चुटकी लेते हुए कहा कि कही पे निगाहे कही पे निशाना , दरअसल यह नोटिस उद्धव को डराने के लिए हैं . उद्धव को मुख्यमंत्री पद से दूर करने के लिए दी गई है।इस नोटीस से उद्धव ठाकरे डर जायेंगे और भाजपा सरकार में सत्ता के हिस्सेदारी में मुख्यमंत्री पद की मांग नहीं करेंगे .
Published on:
21 Aug 2019 09:24 pm
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