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maha: हम चरागों की मदद करते रहे उधर चिराग बुझा डाला गया

पासबान-ए-अदब की ओर से इजहार का आयोजन हम चरागों की मदद करते रहे उधर चिराग बुझा डाला गया शाम शुरू हुए मुशायरे में देश के जाने माने शायरों ने ऊनी गजलें कहीं। कार्यक्रम का पत्रिका.कॉम डिजिटल पार्टनर तो मुंबई पत्रिका भी सहयोगी रहा। जो मैं ही मैं ना रहा तो तू ही तू कहां तक का था, जो कभी गालिब की आंख से। नफरतों से लड़ो प्यार करते रहो अपने होने का इजहार करते रहो उम्र ही है...।

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maha: हम चरागों की मदद करते रहे उधर चिराग बुझा डाला गया

maha: हम चरागों की मदद करते रहे उधर चिराग बुझा डाला गया

मुंबई. हम चरागों की मदद करते रहे, उधर चिराग बुझा डाला गया...यह सुना मनीष शुक्ल ने महफिल में दाद बटोरी। शनिवार को पासबान-ए-अदब संस्था की ओर से आयोजित इजहार (अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन ) के 11वें संस्करण में वर्ली का नेहरू सेंटर तालियों और वाहवाही की शाबाशी से गूंजता रहा। दिन भर चले इस प्रोग्राम में चार सेशन हुए। देर शाम शुरू हुए मुशायरे में देश के जाने माने शायरों ने ऊनी गजलें कहीं। कार्यक्रम का पत्रिका.कॉम डिजिटल पार्टनर तो मुंबई पत्रिका भी सहयोगी रहा।
आयोजन में कुंवर रणजीत सिंह ने सुनाया, जो मैं ही मैं ना रहा तो तू ही तू कहां तक का था, जो कभी गालिब की आंख से। मदन मोहन दानिश ने कुछ इस अंदाज में तालियां बटोरी... नफरतों से लड़ो प्यार करते रहो अपने होने का इजहार करते रहो उम्र ही है...। मुजफ्तर अब्दाली ने सुनाया...बहुत दिनों से यही सोच कर नहीं जागे कि आंख खुलने पर कुछ ख्वाब मर भी सकते हैं, हजूर देख के कश्कोल (भिखारी का कटोरा) को उदास न हो, जिन्होंने खाली किया है वे भर भी सकते हैं। इरशाद कामिल ने कहा, खुश रहना हर हाल में ये ताकीद बचाती आई है अपने जैसे कितनों को उम्मीद बचाती आई है, वह कहता है नई दुनिया, मैं कहता है कयामत है, दिखावे की नमाजें हैं, सियासत की इमामत है, तू रूठे तो मना लू मैं रूठूं तू मना ले अभी यह खेल जारी है समझ रिश्तों सलामत है।
दास्तानगोई के तहत उर्दू में महाभारत की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के ओपन माइक में शामिल हुए 20 महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी तीन सर्वश्रेष्ठ रचना सुनाई, जिन्हें पुरस्कृत किया गया। पासबान-ए-अदब के अध्यक्ष और राज्य पुलिस के महानिरीक्षक (आईजी) कैसर खालिद ने बताया कि लोगों के बीच अलगाव बढ़ता जा रहा है। हम अलग-अलग भाषा के माध्यम से लोगों के बीच संवाद स्थापित कर लोगों में आपसी भाई चारा बढ़ाने की कोशिश इस कार्यक्रम के माध्यम से करते हैं। आयोजन में खान समीम, अथहर शकील, रंजित सिंग चौहान, शरीक कैफ़ी, डॉ लक्ष्मण शर्मा, रफीया सबनम आबिदी, इजाज़ आसद, डॉ ज़ाकिर, कमर सिद्धिकी आदि मौजूद रहे।