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aacharya mahapragya का 100वां जन्मोत्सव ज्योतिर्मय का आयोजन कल

आचार्य के अवदानों व संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

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मुंबई

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Binod Pandey

Jun 29, 2019

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aacharya mahapragya का 100वां जन्मोत्सव ज्योतिर्मय का आयोजन कल

मुंबई. तेरापंथी सभा मुंबई की ओर से आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी महोत्सव पर भावांजलि कार्यक्रम ज्योतिर्मय का आयोजन 30 जून की शाम षणमुखानंद हाल सायन में किया जाएगा। सभाध्यक्ष नरेंद्र तातेड़ ने बताया कि जन्म शताब्दी की शुरुआत बेंगलूरू में आचार्य महाश्रमण के द्वारा की जाएगी। मंत्री विजय पटवारी ने बताया कि कार्यक्रम में समाज के 250 से ज्यादा बच्चे, महिला मंडल व ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से आचार्य महाप्रज्ञ के अवदानों व संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। कोषाध्यक्ष योगेश चौधरी के अनुसार मुख्य सहयोगी रमेश कुमार निलेश कुमार धाकड़ व सह सहयोगी चंचल बोहरा, व आशा जैन एव नितिन डागा हैं। महिला मंडल अध्यक्ष जयश्री वडाला के अनुसार कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी लोग जुटे हैं।

अध्यात्म योगी थे आचार्य महाप्रज्ञ
समृद्ध ऋ षि परंपरा के उज्ज्वल नक्षत्र का पर्याय हैं आचार्य महाप्रज्ञ। उनकी आध्यात्मिक यात्रा प्रबल पुरुषार्थ और समर्पण की प्रतीक है। गुरु तुलसी के सिखाए हर सबक अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान को उन्होंने मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। एक बार किसी प्रोफेसर ने उनसे पूछा कि आपने किस विश्वविद्यालय से पढ़ाई की तो उन्होंने सहजता से बोला तुलसी यूनिवर्सिटी से। अध्यात्म, योग, दर्शन, चिंतन और साहित्य के क्षेत्र में आचार्य महाप्रज्ञ का योगदान अमिट है। उन्होंने 300 से ज्यादा मौलिक साहित्य का सृजन किया। अहिंसा यात्रा के जरिए समाज को शांति, व्यसन मुक्ति, नैतिकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। महाप्रज्ञ के अभूतपूर्व कार्यों से पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम प्रभावित थे। आचार्य ने उनको शांति मिसाइल बनाने की प्रेरणा दी। दोनों महापुरुषों ने मिलकर सुखी परिवार-समृद्ध राष्ट्र पुस्तक की रचना कर विकसित राष्ट्र की योजना देश के सामने रखी। ऐसी विभूति का जन्म शताब्दी पर शत-शत वंदन और अभिवंदन। - मनोहर गोखरू, पूर्व कार्याध्यक्ष, तेरापंथ समाज

आचार्यश्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष पर नमन
आचार्य महाप्रज्ञ के विचारों में परमात्मा को देखा जा सकता है। उन्होंने जीवन को सुनियोजित और संतुलित बनाने के तीन महत्वपूर्ण तत्व देव, गुरु और धर्म बताए। इनमें भी गुरु का महत्व सबसे बड़ा बताया। क्योंकि गुरु ही देव और धर्म से परिचित करवाते हैं। ऐसे पूज्य परम उपकारी ज्ञानसागर गुरुदेव के ऋ ण से हम कैसे ऋ ण हो सकते हैं और उनकी विशालता को शब्दों में कैसे बयां कर सकते है। ज्ञान के अक्षय भंडार और प्रज्ञा के हिमालय स्वरूप आपकी करुणा, अहिंसा भावना, अनेकांत प्रेक्षा ध्यान जीवन विज्ञान आदि की अखंड ज्योति से संपूर्ण मानव समाज लाभान्वित हो रहा है।
विजय पटवारी, सभा मंत्री मुंबई

मेरे जैसा युवा उनका विशेष ऋ णी
आचार्य महाप्रज्ञ सकारात्मक सोच की जीवंत धारा थे। आज धर्मसंघ की ललाट पर ज्योतिर्मय महादीप बनकर आलोक से संपूर्ण मानव समाज को अहिंसा, अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान की अखंड ज्योति से नई रोशनी प्रदान कर रहे हैं। मेरे जैसा युवा उनका विशेष ऋ णी है। करुणामई वत्सलता एवं युगानुरूप प्रेरणाओं से कर्मठता अनेक उपलब्धियों के साथ उजागर हो रही हैं। तथा समाज की सभी वरिष्ठ एवं विशिष्ट संस्थाओं में उच्चपदों पर आसीन होकर स्वयं के आध्यात्मिक विकास को पुष्ट करते हुए संघ एवं समाज विकास में भी दायित्व का निर्वहन कर अपने आप को धन्य महसूस कर रहे हैं। भगवती लीला पटवारी, उपाध्यक्ष सभा टीम मुंबई डोंबिवली चारभुजा