
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में आगामी 29 शहरों के महानगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आज नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन सभी दलों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। कहीं टिकट मिलने पर जश्न का माहौल रहा, तो कई जगहों पर ऐन वक्त पर नाम कटने से नाराजगी खुलकर सामने आई। लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगे, जबकि हाल में दल बदलने वाले नेताओं को टिकट दिए जाने से अंदरूनी असंतोष बढ़ गया।
महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज महायुति गठबंधन में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे), एनसीपी (अजित पवार) शामिल है। लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर ऐसी दरार पड़ी है कि 14 नगर निगमों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना का गठबंधन नहीं हो सका। जबकि अजित गुट कुछ जगहों को छोड़कर कहीं भी साथ नहीं है।
सीटों के बंटवारे और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई के चलते भाजपा और शिंदे गुट ने नवी मुंबई, उल्हासनगर, मीरा-भायंदर, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, नासिक, छत्रपती संभाजीनगर, अकोला, अमरावती, नांदेड, धुले, जालना, सांगली और मालेगांव नगर निगमों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अब इन शहरों में महायुति के ही घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते नजर आएंगे।
जहां एक तरफ 14 शहरों में गठबंधन नहीं हो सका, वहीं मुंबई (BMC) और ठाणे में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। बीएमसी चुनाव में भाजपा 137 और शिंदे की शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन मुंबई और ठाणे में भी अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को इस गठबंधन से दूर रखा गया है। अजित पवार की एनसीपी मुंबई में अकेले चुनाव लड़ रही है और अब तक 60 से ज्यादा उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है।
महायुति में शामिल केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की आरपीआई (RPI) भी बेहद नाराज है। अठावले ने सीट बंटवारे को ‘विश्वासघात’ करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी को सम्मानजनक सीटें नहीं दी गईं। अठावले ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी मुंबई में 38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
अठावले ने कहा कि महायुति की स्थापना के बाद से उनकी पार्टी पूरी निष्ठा के साथ गठबंधन के साथ खड़ी रही है, लेकिन सीट बंटवारे में जो हुआ, वह भरोसे के साथ धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें छह या सात सीटें भी मिलतीं, तो कोई समस्या नहीं थी, लेकिन जिन सीटों की पेशकश कल रात में की गई, वो सब उनकी मांग में ही नहीं थीं। वहां अचानक चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं की जा सकती।
इसके बाद भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने रामदास अठावले से मुंबई में मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल गतिरोध बना हुआ है। दरेकर ने कहा कि अठावले नाराज नहीं है, वो महायुति के साथ हैं, लेकिन उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं का दबाव स्वाभाविक है। उनकी भूमिका और सम्मान को गरिमापूर्ण तरीके से सुनिश्चित किया जाएगा।
भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर से मुलाकात के बाद आरपीआई प्रमुख ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनसे बात की है और जल्द ही एक बैठक कर समाधान निकालने पर चर्चा होगी। इसके बाद हम आगे की रणनीति बनाएंगे।
गौरतलब हो कि मुंबई समेत राज्य की सभी महानगरपालिकाओं में 15 जनवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को मतगणना होगी। नामांकन प्रक्रिया आज (30 दिसंबर) खत्म हुई। अब नामांकन पत्रों की जांच 31 दिसंबर को की जाएगी और उम्मीदवार 2 जनवरी तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 3 जनवरी को अंतिम उम्मीदवार सूची और चुनाव चिन्ह जारी किए जाएंगे।
Updated on:
31 Dec 2025 10:36 am
Published on:
30 Dec 2025 06:38 pm
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