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‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ से 10 महीने में 1236 बच्चों को फिर मिला माता-पिता का प्यार, RPF ने पेश की मिसाल

Railway Protection Force: मध्य रेलवे के मुंबई मंडल से सबसे अधिक 539 बच्चों को बचाया, जिसमें 378 लड़के और 161 लड़कियां शामिल हैं। जबकि भुसावल डिवीजन से 257 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 138 लड़के और 119 लड़कियां शामिल हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Nov 10, 2022

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Operation Nanhe Farishte: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को रेलवे संपत्ति, यात्री क्षेत्र, यात्रियों और उससे जुड़े मामलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतीय रेलवे की सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आरपीएफ (Railway Protection Force) ने कई ऑपरेशन शुरू किए है। इसी में से एक ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ भी है, जिसके तहत आरपीएफ के जवान भूले-भटके बच्चों को बचा रहे है।

‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के अंतर्गत आरपीएफ देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों की पहचान करने और उन्हें बचाने का नेक काम करता है, जो विभिन्न कारणों से खो जाते हैं या अपने परिवार से अलग हो जाते हैं। मध्य रेलवे (Central Railway) के आरपीएफ ने अन्य एजेंसियों के सहयोग से 1236 बच्चों को बचाया है। यह भी पढ़े-ICICI Bank की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने टर्मिनेशन को बताया सही

पिछले 10 महीनों में यानी जनवरी 2022 से अक्टूबर 2022 तक ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत मध्य रेलवे के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्मों से रेलवे पुलिस और अन्य फ्रंटलाइन रेलवे कर्मचारियों ने यह सराहनीय काम किया है। इसमें 822 लड़के और 414 लड़कियां शामिल हैं।

सभी को चाइल्डलाइन (Childline) जैसे गैर सरकारी संगठनों (NGO) की मदद से उनके माता-पिता से मिलवाया गया हैं। मध्य रेलवे के मुंबई मंडल से सबसे अधिक 539 बच्चों को बचाया, जिसमें 378 लड़के और 161 लड़कियां शामिल हैं। जबकि भुसावल डिवीजन से 257 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 138 लड़के और 119 लड़कियां शामिल हैं।

पुणे डिवीजन में 245 बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवाया गया, जिनमें 195 लड़के और 50 लड़कियां शामिल हैं। इसके साथ ही नागपुर डिवीजन से 142 बच्चों को बचाया गया, जिसमें 78 लड़के और 64 लड़कियां शामिल हैं। सोलापुर मंडल में 33 लड़के और 20 लड़कियां समेत कुल 53 बच्चों को सकुशल बचाकर उनके परिजनों को सौंपा गया।

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