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Maharashtra: राज्य परिवहन के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, शिंदे सरकार ने दिया दिवाली बोनस का तोहफा

Maharashtra State Transport Employee Bonus: महाराष्ट्र में एमएसआरटीसी की आय 450 करोड़ रुपये प्रति माह है, जबकि खर्च 650 करोड़ रुपये प्रति माह है। सिर्फ एसटी कर्मचारियों को पगार देने के लिए 310 करोड़ रुपये की जरुरत होती हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 19, 2022

Eknath Shinde ST Diwali Bonus

महाराष्ट्र परिवहन के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले

MSRTC ST Bus News: महाराष्ट्र के हजारों एसटी कर्मचारियों (Maharashtra State Transport Employee) की दिवाली (Diwali 2022) बढ़िया बीतेगी। दरअसल शिंदे-फडणवीस सरकार ने एसटी कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत एसटी कर्मचारियों को दिवाली तोहफा (Diwali Bonus) के रूप में बोनस मिलेगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) को 45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, एसटी कर्मचारियों ने मांग की थी कि उन्हें भी मुंबई के बेस्ट कर्मचारियों की तरह ही दिवाली बोनस दिया जाए। जिसके बाद राज्य सरकार ने एसटी निगम को पैसे दिए और एसटी अधिकारियों को 5000 रुपये और एसटी कर्मचारियों को 2500 रुपये बोनस देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही एसटी के हजारों कर्मचारियों को जल्द ही उनकी अटकी हुई सैलरी भी मिल जाएगी। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र परिवहन के 20 हजार कर्मचारियों की सैलरी अटकी, शिंदे-फडणवीस सरकार में भी नहीं सुधरे हालात

दरअसल निर्धारित तिथि से कई दिन बाद भी सैलरी नहीं मिलने से एसटी कर्मियों में असंतोष है। इसके बाद हाल ही में राज्य सरकार ने कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके वेतन, बोनस, बकाया भत्ते आदि का रास्ता साफ करते हुए 300 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी थी।

बताया जा रहा है कि राज्यभर में एमएसआरटीसी की आय 450 करोड़ रुपये प्रति माह है, जबकि खर्च 650 करोड़ रुपये प्रति माह है। एमएसआरटीसी को हर महीने अपने कर्मचारियों को पगार देने के लिए 310 करोड़, बसों के डीजल के लिए 250 करोड़ और अन्य कामों के लिए 90 करोड़ रुपये की जरुरत होती हैं।

बीते साल एसटी कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर करीब पांच महीने तक हड़ताल किया था। यह हड़ताल एक ऐतिहासिक हड़ताल थी। तब तत्कालीन एमवीए सरकार (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन) द्वारा उनकी कुछ मांगों को स्वीकार कर हड़ताल को ख़त्म करवाया गया था।