
Maharashtra Government: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मीरा भयंदर नगर निगम (एमबीएमसी) ने निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध के बाद ज्ञान ज्योति सावित्रीबाई फुले उद्यान में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए 1,208 पेड़ों को काटने की अपनी योजना को रद्द कर दिया है। यह निर्णय महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक द्वारा मंगलवार को पार्क का दौरा करने और नगर निगम के अधिकारियों को प्रस्तावित एसटीपी के लिए वैकल्पिक स्थल खोजने का निर्देश देने के बाद लिया गया।
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा "निवासियों को नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता है, लेकिन यह हरित क्षेत्रों को नष्ट करने की कीमत पर नहीं आ सकता। मैंने एमबीएमसी को एसटीपी के लिए एक वैकल्पिक स्थान खोजने का निर्देश दिया है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उद्यान का पारिस्थितिकी तंत्र बरकरार रहे।"
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के मीरा भयंदर नगर निगम की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 1,208 पेड़ों को काटने की योजना से स्थानीय लोगों में रोष फैल गया था। स्थानीय लोगों का तर्क था कि पेड़ों को काटने से पर्यावरण पर गंभीर परिणाम होंगे। इस दौरान लोगों ने मांग उठाई थी कि एमबीएमसी अपने प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे और पारिस्थितिकी संरक्षण को प्राथमिकता दे। लोगों ने मीरा भयंदर नगर निगम में निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बताते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया। मंगलवार को भी ज्ञान ज्योति सावित्रीबाई फुले उद्यान में लोगों ने मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया। इसके बाद महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री ने मीरा भयंदर नगर निगम को निर्णय बदलने के लिए कहा।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पर्यावरण कार्यकर्ता धीरज परब, प्रदीप जंगम और अधिवक्ता कृष्ण गुप्ता के साथ पार्क का दौरा किया। जहां निवासियों ने पेड़ों को काटने के निर्णय के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई थी। स्थानीय लोगों की बात पर सहमति जताते हुए परिवहन मंत्री ने एमबीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त सचिन बांगर, सिटी इंजीनियर दीपक खम्बित और सहायक आयुक्त कंचन गायकवाड़ को पेड़ काटने की योजना को रोकने का निर्देश दिया।
उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एमबीएमसी आयुक्त संजय काटकर से फोन पर बात भी की। मंत्री के हस्तक्षेप से आस-पास की लगभग 30 हाउसिंग सोसाइटियों के निवासियों को काफी राहत मिली है, जो इस कदम के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध कर रहे थे। स्थानीय पर्यावरणविदों ने इस निर्णय का स्वागत किया और एमबीएमसी से विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय पर्यावरण के अनुकूल समाधान अपनाने का आग्रह किया।
पर्यावरण कार्यकर्ता एडवोकेट कृष्ण गुप्ता ने कहा, “यह जीत लोगों की है। यह याद दिलाता है कि नागरिक भागीदारी हमारे पर्यावरण को संरक्षित करने में अंतर ला सकती है। हमें उम्मीद है कि भविष्य की परियोजनाओं की योजना अधिक सार्वजनिक परामर्श के साथ बनाई जाएगी।” लोगों ने कहा कि एमबीएमसी नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए जिम्मेदार है, लेकिन उसका पेड़ों को काटने के लिए लिया गया फैसला पर्यावरण के लिए ठीक नहीं माना जा सकता। वहीं पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विकास की ओर से तेजी से बढ़ रहे मीरा भयंदर जैसे शहर में हरियाली की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
Published on:
05 Mar 2025 05:32 pm
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