
सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मराठी भाषा के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए दो कड़े फैसले लिए हैं। एक ओर जहां नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माने और मान्यता रद्द करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर 1 मई से राज्य के सभी ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि सरकार के इस कदम का परिवहन यूनियन कड़ा विरोध कर रहे है।
महाराष्ट्र सरकार ने मराठी भाषा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अब नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य में मराठी पढ़ाना पहले से अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे थे। अब ऐसे संस्थानों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को एक अहम सरकारी आदेश जारी करते हुए राज्य के सभी स्कूलों को मराठी पढ़ाने के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि खासतौर पर केंद्रीय बोर्ड से जुड़े कई स्कूल इस नियम को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महाराष्ट्र अनिवार्य मराठी भाषा शिक्षण एवं अधिगम अधिनियम, 2020 के तहत कक्षा 1 से 10 तक मराठी विषय पढ़ाना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। यह नियम हर प्रकार के बोर्ड और माध्यम पर समान रूप से लागू होता है।
सरकार ने इस नियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संभागीय उपशिक्षा निदेशकों को जिम्मेदारी सौंपी है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने के दो महीने के भीतर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा।
यदि किसी स्कूल में मराठी नहीं पढ़ाई जा रही पाई गई, तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा और 15 दिन के भीतर जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं होने पर जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
स्कूल प्रबंधन को दंड के खिलाफ शिक्षा निदेशक के समक्ष अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों के लिए भी मराठी भाषा को अनिवार्य करने का बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1 मई 2026 यानी महाराष्ट्र दिवस से सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी होगा।
सरकार के अनुसार चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। यदि कोई चालक बुनियादी दक्षता साबित नहीं कर पाता, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इसके लिए राज्यभर में विशेष अभियान चलाकर चालकों की भाषा क्षमता की जांच की जाएगी।
सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि यात्रियों के साथ बेहतर संवाद हो सके और किसी तरह की गलतफहमी न हो। यह नियम मोटर वाहन कानूनों के तहत लागू किया जाएगा और इसकी सख्ती से निगरानी होगी।
राज्य सरकार के इस फैसले का ऑटोरिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने विरोध शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती के अध्यक्ष शशांक राव ने इसे चालकों पर अनुचित दबाव बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में चालक दूसरे राज्यों से आते हैं और उन्हें अचानक नई भाषा सीखने के लिए बाध्य करना उनके रोजगार पर असर डाल सकता है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस नियम को लागू करने से पहले पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।
Published on:
19 Apr 2026 10:08 am
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