
राज ठाकरे की मनसे ऑटो पर लगा रही ‘मी मराठी बोलतो’ का स्टिकर (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले के बीच अब फडणवीस सरकार के रुख में हल्की नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। एक ओर जहां राज्य सरकार इस नियम को 1 मई से लागू करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ गैर-मराठी चालकों को मराठी सिखाने के लिए प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इस बीच राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की एंट्री से यह मुद्दा और ज्यादा गर्म हो गया है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया कि सरकार ऑटो, टैक्सी, ओला-उबर और ई-बाइक चालकों के लिए मराठी सिखाने का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि 1 मई यानी महाराष्ट्र दिवस से इस नियम को लागू करने की तैयारी है, लेकिन सरकार का फोकस सिर्फ अनिवार्यता पर नहीं, बल्कि चालकों में मराठी भाषा के प्रति सहजता और अपनापन पैदा करने पर भी है।
इसी दिशा में 24 अप्रैल को विशेषज्ञों, साहित्यकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रशिक्षण मॉडल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार की योजना के अनुसार, राज्य में सभी प्रकार के सार्वजनिक परिवहन चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करना अनिवार्य होगा।
राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, 1 मई से महाराष्ट्र में लाइसेंसधारी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता साबित करनी होगी। यह सत्यापन राज्य के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) की ओर से किया जाएगा। जो चालक इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवहन अधिकारी ने नियमों को नजरअंदाज कर गलत तरीके से लाइसेंस जारी किया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले के बाद मनसे (MNS) ने मुंबई महानगर में अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी की परिवहन इकाई ऑटो रिक्शा पर मराठी भाषा से जुड़े संदेश वाले स्टिकर लगा रही है। साथ ही मराठी भाषी चालकों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी विरोध या हड़ताल का हिस्सा न बनें।
मुंबई इकाई के अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने कहा कि अब उन ऑटो चालकों को सबक सिखाने का समय आ गया है, जो मराठी में बात करने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा कि मनसे ऑटो रिक्शा पर ‘मी मराठी बोलतो’ (मैं मराठी बोलता हूं), ‘मला मराठी समजते’ (मुझे मराठी समझ में आती है) और ‘माझ्या रिक्षात तुम्ही बसू शकता’ (आप मेरी ऑटो रिक्शा में बैठ सकते हैं) ऐसे संदेश वाले स्टिकर लगाएगी, ताकि यात्रियों को मराठी बोलने वाले चालकों की पहचान हो सके।
महाराष्ट्र सरकार के मराठी अनिवार्यता के फैसले और मनसे के अभियान के बाद राज्य में भाषा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस फिर तेज हो गई है। एक तरफ इसे मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे लागू करने के तरीके और संभावित प्रभावों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राज्य के सबसे बड़े ऑटो यूनियन 'मुंबई रिक्शा मेन्स यूनियन' (Mumbai Autorickshawmen's Union) ने इस फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो आक्रामक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
यूनियन की ओर से 28 अप्रैल को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपकर 1 मई से लागू होने वाले इस आदेश को वापस लेने की मांग की जाएगी। अगर सरकार ने मांग नहीं मानी, तो 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
यूनियन नेता शशांक राव के मुताबिक, पूरे महाराष्ट्र में करीब 15 लाख ऑटो चालक इस आंदोलन में शामिल होंगे। इनमें से लगभग 5 लाख चालक मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के हैं। अकेले मुंबई में ही लगभग 2.8 लाख ऑटो हैं।
शशांक राव ने यह भी कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में चालक दूसरे राज्यों से हैं और उन्हें अचानक नई भाषा सीखने के लिए बाध्य करना उनके रोजगार पर असर डाल सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस नियम को लागू करने से पहले पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।
Updated on:
23 Apr 2026 05:33 pm
Published on:
23 Apr 2026 05:28 pm
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