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‘सबक सिखाने का सही समय’, मराठी की अनिवार्यता पर मनसे अड़ी, कहा- अब हिंदी नहीं चलेगी

MNS on Auto Driver Marathi Protest: महाराष्ट्र में आगामी 1 मई यानी 'महाराष्ट्र दिवस' से लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना आना जरूरी होगा। मुंबई ऑटो रिक्शा मेन्स यूनियन ने इस फैसले के खिलाफ 4 मई से आंदोलन का ऐलान किया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 22 Apr 2026, 5:33 PM IST

Marathi mandatory Raj Thackeray MNS

उत्तर भारतीयों को मराठी सिखाने पर राज ठाकरे खफा! (Photo: X/IANS)

महाराष्ट्र में 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से ऑटो रिक्षा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार के इस फैसले के तहत लाइसेंसधारी चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना जरूरी होगा। जो चालक इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। हालांकि इसके विरोध में मुंबई ऑटो रिक्शा मेन्स यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है और 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सड़कों पर 'स्टिकर अभियान' शुरू कर दिया है।

पूरे राज्य में चलेगा जांच अभियान

मोटर परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों (RTO) के जरिये विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान यह जांचा जाएगा कि चालक मराठी भाषा बोल, पढ़ और लिख सकते हैं या नहीं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ कहा है कि नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

मनसे भी मैदान में कूदी

इस फैसले के बाद राज ठाकरे की मनसे भी सक्रिय हो गई है। मनसे ने मराठी बोलने वाले रिक्षा चालकों के समर्थन में अभियान शुरू किया है। उपनगरों में ऑटोरिक्षा पर ‘मैं मराठी बोलता हूं, मेरी रिक्शा में बैठिए’ वाला स्टिकर लगा रही है।

मुंबई के मनसे प्रमुख संदीप देशपांडे ने कहा कि मराठी का विरोध करने वाले ऑटोरिक्षा चालकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। उन्होंने मराठी बोलने वाले ड्राइवरों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी विरोध या हड़ताल का हिस्सा न बनें।

हिम्मत है तो... मनसे की चेतावनी

संदीप देशपांडे ने कहा, "यह उन लोगों को सबक सिखाने का सही समय है जो मराठी भाषा का विरोध करते हैं। महाराष्ट्र में रहना है तो यहां की भाषा आनी ही चाहिए। देश के किसी भी राज्य में जाने पर वहां की स्थानीय भाषा सीखे बिना काम नहीं मिलता, तो महाराष्ट्र ने क्या पाप किया है? हमारा सिखाने का तरीका अलग है, जिसे मराठी नहीं आती उन्हें अब हम सिखाएंगे।"

मनसे नेता और प्रवक्ता देशपांडे ने गैर-मराठी चालकों को चुनौती देते हुए कहा, "अगर किसी में हिम्मत है, तो टक्कर ले कर दिखाए। हमें मराठी नहीं आती, हिंदी में बोलो, अब महाराष्ट्र में यह रवैया नहीं चलेगा।"

स्थानीय भाषा आना जरूरी- परिवहन मंत्री

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया कि जिस राज्य में कोई व्यक्ति काम करता है, वहां की भाषा सीखना उसका कर्तव्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे अपनी मातृभाषा का सम्मान जरूरी है, वैसे ही दूसरे राज्य में काम करते समय वहां की भाषा का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खासकर सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि यात्रियों के साथ बेहतर संवाद हो सके और किसी तरह की गलतफहमी न हो। यह नियम मोटर वाहन कानूनों के तहत लागू किया जाएगा और इसकी सख्ती से निगरानी होगी।

अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवहन अधिकारी ने नियमों को नजरअंदाज कर गलत तरीके से लाइसेंस जारी किया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मराठी की अनिवार्यता के खिलाफ यूनियन

इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। जहां एक तरफ राज्य सरकार और मनसे मराठी अनिवार्यता को लेकर सख्त नजर आ रहे हैं, वहीं कुछ संगठनों ने इस फैसले का विरोध भी शुरू कर दिया है।

राज्य के सबसे बड़े ऑटो यूनियन 'मुंबई रिक्शा मेन्स यूनियन' (Mumbai Autorickshawmen's Union) ने इस फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो आक्रामक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

यूनियन नेता शशांक राव के मुताबिक, पूरे महाराष्ट्र में करीब 15 लाख ऑटो चालक इस आंदोलन में शामिल होंगे। इनमें से लगभग 5 लाख चालक मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के हैं। अकेले मुंबई में ही लगभग 2.8 लाख ऑटो हैं।

28 अप्रैल को सरकार को सौंपेंगे ज्ञापन

यूनियन ने सरकार को 28 अप्रैल तक का समय दिया है। इस दिन परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपकर 1 मई से लागू होने वाले इस आदेश को वापस लेने की मांग की जाएगी। अगर सरकार ने मांग नहीं मानी, तो 4 मई से आंदोलन किया जाएगा।

यूनियन का आरोप, ऑटो-टैक्सी चालकों को निशाना बना रहे

यूनियन नेता शशांक राव ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के पारंपरिक ऑटो और काली-पीली टैक्सी चालकों के साथ भेदभाव कर रही है। यूनियन का दावा है कि मौजूदा चालकों के पास पहले से ही मराठी का कामकाजी ज्ञान है, जो उन्होंने बैच प्राप्त करते समय साबित किया था। ऐसे में अचानक नया नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।

उनका कहना है कि ओला-उबर जैसे ऐप आधारित कैब ड्राइवरों पर ऐसी कोई सख्ती नहीं है, उन ड्राइवरों के लिए मराठी की कोई अनिवार्यता नहीं है। न ही अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर कार्रवाई हो रही है। इसके बावजूद नियमों का पालन करने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों पर ही दबाव डाला जा रहा है।

प्रशिक्षण की व्यवस्था करें- शशांक राव

शशांक राव ने यह भी कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में चालक दूसरे राज्यों से हैं और उन्हें अचानक नई भाषा सीखने के लिए बाध्य करना उनके रोजगार पर असर डाल सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस नियम को लागू करने से पहले पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।