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Maharashtra News: कैबिनेट की बैठक में शिंदे सरकार ने लिया बड़ा फैसला, स्वतंत्रता सेनानियों को अब 20 हजार मिलेगी पेंशन

शिंदे सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया हैं। सरकार ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम और गोवा मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन वीरवार को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति माह कर दी है। इसके अलावा भर्ची प्रक्रिया को भी इजाजत दे दी गई है।

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CM Eknath Shinde

शिंदे सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया हैं। महाराष्ट्र सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ा तोहफा दिया है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम और गोवा मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन वीरवार को 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रति महीना कर दी गई है। सीएम एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में यहां हुई साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में इसका फैसला किया गया।

कैबिनेट ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों (मराठों) को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की श्रेणी के तहत नौकरियों के कोटा का फायदा उठाने की इजाजत देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी, जिसकी संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। यह भी पढ़े: Maharashtra News: पति के खून के बाद पत्नी ने किया आशिक को कॉल, बेटी ने ऐसी खोली पोल

मुख्यमंत्री ऑफिस (CMO) के एक बयान में कहा गया कि इस मामलें में कैबिनेट ने 9 सितंबर 2020 के बाद शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया को इजाजत दे दी हैं। बयान में कहा गया कि बैठक में सहकारिता डिपार्टमेंट के उन किसानों को इजाजत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं। कैबिनेट ने राज्य में सड़क विकास परियोजनाओं के लिए ऋण के जरिए करीब 35629 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इससे ऐसी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने में सहयोग मिलेगा।

बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और वायुसेना को आदेश दिया कि वे शार्ट सर्विस कमीशन की 32 सेवानिवृत्त महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ देने के उद्देश्य से उनकी उपयुक्तता के आधार पर स्थायी कमीशन देने पर विचार करें। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पार्डीवाला की पीठ ने हालांकि इस आधार पर उनकी सेवा बहाली का निर्देश देने से मना कर दिया कि उन्हें 2006 और 2009 के बीच सेवा से फ्री कर दिया गया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि देशसेवा की अनिवार्यताओं से संबंधित आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बहाली एक व्यवहार्य विकल्प नहीं हो सकता।