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MLC चुनाव: उद्धव खुद फोन करें तो… ठाकरे को मिला शिंदे गुट से खुला ऑफर

शिवसेना सांसद ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे को विधान परिषद चुनाव में मदद चाहिए, तो उन्हें खुद एकनाथ शिंदे को फोन करना होगा।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 09, 2026

Uddhav Thackeray and Eknath Shinde

एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी और ठाणे से सांसद नरेश म्हस्के ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक खुला प्रस्ताव दिया है। म्हस्के ने कहा है कि अगर उद्धव ठाकरे को आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों में मदद की जरूरत है, तो उन्हें शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को फोन करना होगा।

शरद पवार को लेकर किया बड़ा दावा

एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में नरेश म्हस्के ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार की उम्मीदवारी के लिए एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने खुद एकनाथ शिंदे को फोन किया था। म्हस्के के अनुसार, शिंदे ने बड़ा दिल दिखाते हुए शरद पवार के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा और उनकी मदद की।

इसी का हवाला देते हुए म्हस्के ने कहा, "सुप्रिया सुले ने शरद पवार को राज्यसभा भेजने के लिए एकनाथ शिंदे को फोन किया था। इसलिए उन्होंने दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारा। एकनाथ शिंदे का मन बहुत बड़ा है। अगर उद्धव ठाकरे को विधान परिषद में अपने उम्मीदवार जिताने के लिए मदद चाहिए, तो उन्हें शिंदे साहब को फोन करना होगा।"

‘ठाकरे गुट में कलह...’

शिवसेना के वरिष्ठ नेता नरेश म्हस्के ने इस दौरान उद्धव ठाकरे की पार्टी में अंदरूनी असंतोष होने का भी दावा किया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि ठाकरे ने सुषमा अंधारे, विनायक राउत या चंद्रकांत खैरे जैसे वफादार नेताओं को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा? म्हस्के ने सवाल उठाया कि क्या आदित्य ठाकरे अपनी पसंद के उम्मीदवार (प्रियंका चतुर्वेदी) के लिए अड़े थे? उन्होंने दावा किया कि संजय राउत और आदित्य ठाकरे के बीच मतभेद हैं और ठाकरे गुट के कई नेता मौजूदा फैसलों से नाखुश हैं।

क्या है इसके सियासी मायने?

महाराष्ट्र में इस समय राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज है। संख्या बल के हिसाब से सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट-NCP अजित पवार) काफी मजबूत स्थिति में है, जबकि कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट, एनसीपी शरद गुट की महाविकास अघाड़ी (MVA) को अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में म्हस्के का यह बयान नए राजनीतिक समीकरण के संकेत दे रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या उद्धव ठाकरे का खेमा इस 'प्रस्ताव' पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है।

बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 सीटें इसी साल मई में खाली होने जा रही हैं। इन सीटों के लिए चुनाव आयोग अप्रैल में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। विधानसभा में मौजूदा आंकड़ों के अनुसार महायुति के पास करीब 235 विधायक हैं, जिसके आधार पर माना जा रहा है कि वह 9 में से लगभग 8 सीटें आसानी से जीत सकती है। वहीं, विपक्षी गठबंधन एमवीए के पास लगभग 46 विधायक हैं, इसलिए उसके खाते में सिर्फ एक सीट आने की संभावना जताई जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक पहली वरीयता के आधार पर एक सीट जीतने के लिए महाविकास आघाड़ी को 25 से ज्यादा वोटों की जरूरत पड़ेगी।