महाराष्ट्र में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने राज्य के मंत्री अब्दुल सत्तार द्वारा 'अपमानजनक' शब्दों के उपयोग पर चुप्पी तोड़ी है। सुप्रिया सुले ने अब्दुल सत्तर को लेकर चौंका देने वाला बयान दिया है।
महाराष्ट्र में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। राज्य के मंत्री अब्दुल सत्तार द्वारा एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा हैं और उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग भी उठ रही हैं। इस बीच 'अपशब्द' पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में सुप्रिया सुले ने कहा कि सत्ता में रहने वाले किसी शख्स से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की गई थी और यह महाराष्ट्र की संस्कृति और महिलाओं के सम्मान की परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है। अब्दुल सत्तार के अपशब्द, जिसने सत्तारूढ़ बालासाहेबंची शिवसेना (बीएसएस) को भी माफी मांगने के लिए मजबूर कर दिया।
सुप्रिया सुले ने उस प्रकरण पर भी अपनी स्पष्ट नाराजगी जाहिर की, जिसमें पूरे महाराष्ट्र में एनसीपी कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के अलावा कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं के जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि शिंदे गुट और सहयोगी बीजेपी के नेताओं ने इसे नजरअंदाज कर दिया, कुछ नेताओं ने कहा कि अब्दुल सत्तार की माफी के बाद मामले को खत्म माना जाना चाहिए। यह भी पढ़े: Maharashtra News: सुप्रिया सुले पर विवादित टिप्पणी को लेकर सीएम शिंदे ने अब्दुल सत्तार को चेताया, कहीं ये बात
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि अब्दुल सत्तार की भाषा बेहद ही घिनौनी थी, जिसकी हर तरफ निंदा हो रही है, उन्हें ज्यादा महत्व देने की कोई आवश्यकता नहीं है। सुले ने आग्रह किया, मैं आपके समर्थन के लिए आप सभी का धन्यवाद करती हूं। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि अब इस मामले पर टिप्पणी करना बंद कर दें।
बता दें कि 7 नवंबर को अब्दुल सत्तार ने सुप्रिया सुले के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग करने को लेकर पहले मना किया फिर 'सॉरी' कहा, यहां तक कि शिंदे गुट के नेता दीपक केसरकर ने सरकार की तरफ से माफी मांगकर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास भी किया। बड़े पैमाने पर एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नासिक, औरंगाबाद और अन्य इलाकों में अब्दुल सत्तार की आलोचना करते हुए विरोध प्रदर्शन किया, उनके आधिकारिक निवास और मुंबई और औरंगाबाद में निजी घर पर पथराव किया, और सीएम शिंदे से उन्हें कैबिनेट से निकालने की मांग की।