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Maha Election : विकास की दौड़ में पिछड़ा राज्य का समृद्ध कोंकण क्षेत्र

कोंकण के पांच जिलों में दिख रहा कांटे का मुकाबला, हर मोर्चो को फतह करने की किलेबंदी भाजपा-शिवसेना के मजबूत क्षेत्र में एनसीपी और बविआ की भी धमक विकास के असंतुलन से क्षेत्रों में कई समस्याएं, सरकार की कई नई योजनाओं से क्षेत्र की बदल रही तस्वीर

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मुंबई

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Binod Pandey

Oct 13, 2019

Maha Election : विकास की दौड़ में पिछड़ा राज्य का समृद्ध कोंकण क्षेत्र

Maha Election : विकास की दौड़ में पिछड़ा राज्य का समृद्ध कोंकण क्षेत्र

बिनोद पांडेय
मुम्बई. राज्य के पश्चिमी समुद्र तटीय क्षेत्र कोंकण इन दिनों मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य से लक-दक है, लेकिन राजनीतिक पारा चढऩे से माहौल में गर्माहट कायम है। सुंदर सपाट समुद्री तट, चारों और फैली हरियाली की खूबसूरती मद्धम पड़ गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़कर पांच जिलों की 34 सीटों में से 21 सीट पर कब्जा जमाया था। इस बार दोनों के साथ होने से समझना मुश्किल है कि यह गठबंधन जीत के सारे समीकरण अपनी तरफ मोड़ पाएगा या नहीं।

कई विधानसभा सीटों पर भाजपा-शिवसेना के बागियों के कारण मुकाबला उतना आसान नहीं दिखता, जितना पिछले चुनाव में था। पांच जिलों में ठाणे, पालघर में शिवसेना की मजबूत पकड़ रही तो रत्नागढ़, सिंधुदुर्ग में भाजपा के साथ शिवसेना भी दम रखती है। हालांकि सिंधुदुर्ग में शेतकरी कामदार पक्ष और एनसीपी का जोर भी दिखाई देता है। सिंधुदुर्ग का कणकवली भाजपा और शिवसेना के संबंधों की अग्निपरीक्षा ले रहा है। यहां से भाजपा और शिवसेना दोनों के उम्मीदवार एक दूसरे को हराने के लिए चुनाव मैदान में डटे हैं। मुकाबला भाजपा के नितेश राणे (नारायण राणे के बेटे) और शिवसेना के सतीश सावंत के बीच है। दोनों पार्टियों ने इस सीट को आन की लड़ाई बना ली है। इसके कारण 15 अक्टूबर को सीएम फडणवीस नितेश के पक्ष में चुनावी रैली करेंगे तो उद्धव ठाकरे 16 अक्टूबर को सावंत के पक्ष में रैली कर चुनावी घमासान को जीवंत करेंगे।

ग्रामीण और शहरी अंचल से मिले-जुले कोंकण क्षेत्र में विकास की विपुल संभावनाएं हैं। खेती-बाड़ी से लेकर पर्यटन और औद्योगिक इकाइयों का यहां जाल बिछाया जा सकता है। पिछली सरकारों ने कुछ बड़े प्रोजेक्ट से क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को पैदा किया, पर जैसा अक्सर होता है, स्थानीय युवकों को इसका लाभ नहीं मिला। हां, प्रदूषण-ट्रैफिक की समस्या जरूर मिली। कोकण के पांच जिलों को फोकस कर पिछली भाजपा-शिवसेना की युति ने कई विकास प्रोजेक्ट का संचालन किया, इसके फायदे भी दिखे। अब इन्हें भुनाने की कोशिश में दोनों ही पार्टियां जुटी है।

710 किलोमीटर का समुद्री क्षेत्र

पालघर से लेकर सिंधुदुर्ग क्षेत्र में 710 किलोमीटर का लंबा समुद्री तट है। रायगढ़ का अलीबाग वही क्षेत्र है जहां की खाड़ी के रास्ते वर्ष 1993 में मुंबई बम विस्फोट के लिए आरडीएक्स लाया गया था। इस वजह से यह क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है। इस घटना के बाद से सरकारें सजग हुईं और यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। रायगढ़ सीट पर एनसीपी के सांसद होने से इस क्षेत्र में एनसीपी का प्रभाव दिखता है। पालघर जिले में पिछले चुनाव में भाजपा ने दो और शिवसेना ने एक सीट जीती थी। तीन सीटों पर बहुजन विकास आघाड़ी ने चुनाव जीता था। इस बार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हुआ है, और बहुजन विकास आघाड़ी के उम्मीदवारों को अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। ठाणे में शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के पालक मंत्री होनेे से क्षेत्र में मजबूत पकड़ बना रखी है। रायगढ़ में एनसीपी सांसद सुनील तटकरे के कारण पार्टी ने वर्चस्व बनाया है, जिसे इस बार विधानसभा चुनाव में भुनाने की तैयारी की गई है।

कोंकण रीजन में हैं पांच जिले

पश्चिम महाराष्ट्र का खूबसूरत कोस्टल क्षेत्र का सुरम्य हिस्सा है, कोंकण। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करता है। रीजन में पांच जिले ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग शामिल है। इन पांच जिलों में विधानसभा की 34 सीटें है। ग्रामीण अंचल के अलावा शहरी क्षेत्रों में ठाणे, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, कल्याण और भिवंडी जैसे बड़े और प्रभावशाली इलाके हैं। कई क्षेत्रों में भरपूर खेती है तो दूसरी और बड़ी औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं। पूरे रीजन में करीब एक करोड़ रजिस्टर्ड वोटर इस बार मताधिकार का उपयोग करेंगे।


मुख्य मुद्दे
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1. नगरीय सुविधाओं का टोटा
-कोंकण क्षेत्र के शहरों में नगरीय सुविधाओं का टोटा दिखता है। तेज गति से बढ़ी आबादी के कारण अनप्लांड सिटी की तरह यह बढ़ता चला गया है। इससे यहां ट्रैफिक समस्या, पीने के पानी और गटर निकासी की मूलभूत समस्याएं लोगों की जिंदगी को दूभर बनाती है। अवैध निर्माण चारों ओर दिखाई देते हैं, जिनमें ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, वसई-विरार, भिवंडी मुख्य रूप से शामिल हैं। कई क्षेत्रों में जलापृर्ति की जटिल समस्या है, जिससे नाराज होकर लोग अक्सर विरोध प्रदर्शन करते हैं।

2. स्वास्थ्य सेवाएं
पालघर जिलेे के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। इन क्षेत्रों में छोटी-बड़ी बीमारियों से लोगों की जान जाती है। इलाज के लिए लोगों को महानगर की ओर कूच करना मजबूरी होती है, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लोगों को खलती है।

3. पर्यटन का विकास नहीं
राज्य के इस कोस्टल क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर समुद्री तट है, लेकिन विकास नहीं होने से यह जस के तस पड़े हैं। हरियाली और समुद्री बीच का खूबसूरत नजारे इन क्षेत्रों में भरे हुए हैं, सरकार इस ओर ध्यान दे तो यहां बड़े-बड़े टूरिस्ट प्लेस विकसित हो सकते हैं।

4. बेरोजगारी की समस्या
रोजगार की समस्या की वजह से बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी कृषि छोड़कर रोजगार के लिए मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में आकर बसी हैं। सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और पालघर के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की धीमी गति के कारण लोगों को पलायन को मजबूर होना पड़ा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार की दिक्कत है। इन क्षेत्रों के मेगा प्रोजेक्ट जैतपुर न्यूक्लियर प्लांट, नानर रिफाइनरी भी युवाओं को रोजगार देने में विफल साबित हुए हैं।

दलगत परिणाम ( वर्ष 2014 विधानसभा चुनाव)
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कुल सीटें - 34
शिवसेना-14
भाजपा-07
एनसीपी-06
पीडब्ल्यूपी-02
कांग्रेस-01
बविआ-03
निर्दलीय-01
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मुख्य मुकाबला-
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1. कणकवली
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भाजपा-नितेश राणे
कांग्रेस -सुशील राणे
शिवसेना-सतीश सावंत
मौजूदा विधायक-नितेश राणे (पहले कांग्रेस अब भाजपा में शामिल)
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2. सावंतवाड़ी-
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शिवसेना-दीपक केसरकर
एनसीपी-बबन सालगांवकर
निर्दलीय-राजन तेली (भाजपा समर्थित)
मौजूदा विधायक-दीपक केसरकर (शिवसेना)
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3. एरोली
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भाजपा-गणेश नाईक
एनसीपी-गणेश शिंदे
मौजूदा विधायक-संदीप नाईक (शिवसेना)
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4. वसई
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शिवसेना-विजय पाटील
बविआ-हितेन्द्र ठाकुर
मौजूदा विधायक-हितेन्द्र ठाकुर (बविआ)
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5. नालासोपारा
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शिवसेना-प्रदीप शर्मा
बविआ-क्षितिज ठाकुर
मौजूदा विधायक-क्षितिज ठाकुर (बविआ)

क्षेत्र के चर्चित नेता
संजय केलकर, गणेश नाईक (भाजपा), दीपक केसरकर, एकनाथ शिंदे (शिवसेना), जितेन्द्र आव्हाड, सुनील ताटकारे (एनसीपी), नारायण राणे (अन्य)