14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘मैं रतन टाटा बोल रहा हूं’, कैसे एक फोन कॉल ने बदल दी महाराष्ट्र के इन दो युवाओं की पूरी जिंदगी

रेपोस एनर्जी की को-फाउंडर अदिति ने कहा कि अगले दिन हम सुबह करीब 10 बजे के बाद रतन टाटा के घर पहुंचे और अपना प्रजेंटेशन देने के लिए लिविंग रूम में उनका इंतजार किया। ठीक 11 बजे वो हमारे सामने आए और हमें ऐसा महसूस हुआ जैसे इस समय घड़ी की सारी सूइंया एक साथ बंद हो गई हैं।

3 min read
Google source verification
ratan_tata.jpg

महाराष्ट्र के पुणे स्थित मोबाइल एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन स्टार्टअप रेपोस एनर्जी के संस्थापकों ने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा है कि कैसे मशहूर उद्योगपति रतन टाटा के एक फोन कॉल ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। हाल ही में मोबाइल एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन स्टार्टअप रेपोस एनर्जी ने ऑर्गेनिक कचरे से संचालित एक 'मोबाइल इलेक्ट्रिक चार्जिंग व्हीकल' लॉन्च किया है। रतन टाटा की कंपनी के निवेश से शुरू हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ साल पहले अदिति भोसले वालुंज और चेतन वालुंज ने रेपोस एनर्जी नामक स्टार्टअप शुरू किया था। कुछ समय बीतने के बाद ही उन्हें महसूस हुआ कि इसे आगे बढ़ाने के लिए किसी मेंटर की जरूरत है और वह मेंटर पहले भी इस दिशा में काम किया हो। इसके बाद दोनों रतन टाटा के नाम पर सहमत थे लेकिन इन दोनों को ये भी मालूम था कि रतन टाटा से मिलना इतना आसान नहीं है। यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र के इस गांव में सदियों से नहीं बेचा जाता है 'दूध', जानें इसके पीछे की असल वजह

बता दें इसके बाद अदिति भोसले वालुंज ने रतन टाटा से मिलने की एक तरकीब बताई, लेकिन चेतन ने कहा कि अदिति वह कोई हमारे पड़ोसी नहीं है, जिससे तुम जब कहो और हम मिलने चले जाएं। इसके बाद भी अदिति ने रतन टाटा से मिलने की आस नहीं छोड़ी। रतन टाटा ने मिलने के लिए अदिति ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और उन्होंने ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट में लिखा कि मैंने और चेतन ने बिजनेस की कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन हमने अपने जिंदगी में बहुत पहले ही एक बात सीख ली थी कि- कोई भी बहाना एक नींव का काम करता है, जिसके ऊपर वह शख्स असफलता का घर बनाता है। सब लोगों ने हमें बताया कि आप रतन टाटा से नहीं मिल सकते हैं और यह नामुमकिन है। लेकिन हमने कभी इसे बहाने के तौर पर नहीं लिया, चलो ठीक है फिर इस आईडिया को छोड़ देते हैं. ‘नहीं’ कभी भी विकल्प में नहीं था।

रतन टाटा के घर के बाहर 12 घंटे तक इंतजार भी किया: अदिति ने कहा कि उन्होंने एक 3डी प्रजंटेशन तैयार कर एक हाथ से लिखे लेटर के साथ उसे रतन टाटा के पास भेज दिया। इसके अलावा अदिति ने कुछ सूत्रों से भी संपर्क किया, जो उन्हें रतन टाटा से मिलवा सकते थे। यहां तक कि अदिति ने रतन टाटा के घर के बाहर 12 घंटे तक इंतजार भी किया, लेकिन वो रतन टाटा से नहीं मिल सकीं। इसके बाद वो निराश होकर रात 10 बजे के करीब अपने होटल वापस आ गई। तभी उन्हें एक फोन कॉल आया। अदिति ने उस पल को याद करते हुए कहा कि मैं उस समय फोन उठाना नहीं चाहती थी, लेकिन फिर भी मैंने फ़ोन उठाया और दूसरी तरफ से आवाज आई कि ‘हैलो, क्या मैं अदिति से बात कर सकता हूं.”

“मैं रतन टाटा बोल रहा हूं. क्या हम मिल सकते हैं?”: फ़ोन उठाने के बाद अदिति ने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं? अदिति को दूसरे तरफ से फोन पर आवाज आई, “मैं रतन टाटा बोल रहा हूं. मुझे तुम्हारा लेटर मिला. क्या हम मिल सकते हैं?”

अदिति भोसले वलुंज ने बताया कि उस समय मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह क्या बोलें. वह स्तब्ध हो गई थीं, उनके रोंगटे खड़े हो गए थे, उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे और उनके होठों पर अलग ही मुस्कान थी। अदिति ने आगे लिखा कि अगले दिन मैं और चेतन सुबह 10:45 बजे उनके घर पहुंचे और अपना प्रजेंटेशन देने के लिए लिविंग रूम में उनका इंतजार किया। ठीक 11 बजे नीली शर्ट पहने एक लंबे और गोरे व्यक्ति हमारी ओर आए और हमें ऐसा लगा जैसे इस समय घड़ी की सारी सूइंया एक साथ बंद हो गई हैं। रतन टाटा के साथ ये मीटिंग करीब दोपहर 2 बजे तक चली और वे तीन घंटे हमारे लिए किसी मेडिटेशन से कम नहीं थे, जहां उन्होंने हमारे आईडिया को को सुना, अपने अनुभव शेयर किए और हमारा मार्गदर्शन किया।

रतन टाटा ने दोनों से पूछा कि वह उनसे क्या उम्मीद करती हैं, इस पर दोनों ने जवाब दिया कि सर, लोगों की सेवा करने और हमारे देश को वैश्विक बनाने में हमारी मदद करें। हमारा मार्गदर्शन करें। इस पर रतन टाटा ने कहा कि ठीक है।

बड़ी खबरें

View All

मुंबई

महाराष्ट्र न्यूज़

ट्रेंडिंग