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मारवाड़ी समाज मना रहा होली की अनोखी परंपरा, उड़ता है रंग-गुलाल

1824 से रंगोत्सव मनाने का सिलसिला शुरूश्री बड़ा जगदीश मन्दिर में होने वाले रंगोत्सव में राजस्थानी परम्परा का बखूबी निर्वाह किया जाता है

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Mumbai news

मारवाड़ी समाज मना रहा होली की अनोखी परंपरा, उड़ता है रंग-गुलाल

मुंबई.

भूलेश्वर को मुंबई शहर का काशी कहा जाता है। भूलेश्वर में करीब पांच सौ मंदिर हैं जिनका कोई न कोई ऐतिहासिक महत्व है। भूलेश्वर में एक ऐसा मन्दिर है जहां होली के बाद 15 दिनों तक रंग गुलाल उड़ता है।


कबूतरखाना व फूल बाजार के बीच दो सौ वर्ष पुराने श्री बड़ा जगदीश मन्दिर में मारवाड़ी समाज होली के बाद 15 दिनों तक रंगोत्सव मनाता है जिसमें प्रतिदिन तीन से चार सौ श्रद्धालु भाग लेते हैं। 18वीं सदी में मारवाड़ी समाज दीपावली उत्सव धूमधाम से मनाता था, जब 1824 में श्री बड़ा जगदीश मन्दिर बन गया तबसे होली के बाद रंगोत्सव मनाने का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक अनवरत जारी है। श्री बड़ा जगदीश मन्दिर में होने वाले रंगोत्सव में राजस्थानी परम्परा का बखूबी निर्वाह किया जाता है। मन्दिर में नीम की लकड़ी की बनी मूर्तियां हैं। मन्दिर में मारवाड़ी पारीक ब्राह्मण समाज के पुजारी सेवा करते हैं।
जोधपुर से मुम्बई आये नाथूराम- सवाईनाथ नाम के पुजारी ने इस परंपरा को शुरू किया था जिनके परिजन आज भी मन्दिर के ऊपर एक कमरे में रहते हैं। रंगोत्सव में श्रद्धालु राधा कृष्ण, सीता राम व शिव पार्वती की मूर्तियों पर पुष्प वर्षा करते हैं। 15 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में रोज अलग-अलग मिठाइयों का भोग लगाया जाता है, ढोल मंजीरे बजते हैं और पौराणिक कथाओं पर बाल नाटिका मंचन भी होता है। जगदीश मंदिर में नियमित आने वाले स्थानीय व्यापारी दिलीप माहेश्वरी ने बताया कि श्री बड़ा जगदीश मन्दिर मुम्बई में रहने वाले राजस्थानियों के चार पीढिय़ों के लिए श्रद्धास्थान है, यहां आने वाले भक्तों की मान्यता पूरी होती है इस लिए इसे इच्छा पूर्ति जगन्नाथ मन्दिर भी कहा जाता है।