
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे
Bal Thackeray Birthday: बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर दिखे, जहां राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने के अपने फैसले पर खुलकर बात की। मुंबई के सायन स्थित षण्मुखानंद सभागृह में 23 जनवरी 2026 को हुए इस कार्यक्रम में राज ठाकरे ने कहा कि शिवसेना छोड़ना उनके लिए आसान नहीं था। यह पार्टी छोड़ना नहीं, बल्कि घर छोड़ने जैसा था। अब इसे 20 साल हो चुके हैं। कुछ बातें उन्हें समझ आईं और कुछ उद्धव को समझ आईं।
राज ठाकरे ने अपने भाषण में बालासाहेब ठाकरे की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, आज बालासाहेब के बारे में बोलूं तो मैं और उद्धव घंटों-घंटों बातें कर सकते हैं। जब वो व्यंग्यचित्र बनाते थे, तब जो तल्लीनता उसमें होती थी, मैंने वह देखी है। वे सिर्फ व्यंग्यचित्र नहीं होते थे, वे ध्यान-साधना जैसे होते थे। बाहर आंदोलन और दंगे चल रहे होते थे लेकिन वे पूरी तरह तल्लीन रहते थे। यह क्षमता उन्हें कहां से मिलती थी? वे देश के राजनेताओं में एक अलग ही इंसान थे। दुनिया में उनके जैसा कलाकार कोई दूसरा पैदा नहीं हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि बालासाहेब बाहर कुछ भी चलता रहे, अपनी कला में लगे रहते थे। आज राज्य की राजनीति में गुलामों का बाजार लग गया है। बालासाहेब अब नहीं हैं, यह अच्छा ही है, क्योंकि अगर वे होते तो बहुत व्यथित होते। महाराष्ट्र में इंसानों की नीलामी शुरू हो गई है। चाहे कल्याण-डोंबिवली हो या दूसरे जिले। यह सब देखकर हम व्यथित हो जाते हैं। कई लोग आज दूसरे दलों में दिखाई देते हैं, जिन्हें बालासाहेब ठाकरे ने ही बनाया था।
राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के सामने खुलासा किया, जब मैंने शिवसेना छोड़ी थी, तब हालात अलग थे। कुछ बातें उद्धव ने छोड़ दीं और कुछ बातें मैंने भी छोड़ दीं। सुबह साफ हो जाए तो बेहतर होता है, बजाय इसके कि मन में कुंठा लेकर बैठे रहें। बालासाहेब ठाकरे पर व्याख्यान देना मुझे अच्छा लगेगा। हम घर में रहते हुए भी उस इंसान को पूरी तरह समझ नहीं पाए।
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार के बीच बढ़ती निकटता को दर्शाती है, खासकर हाल के BMC चुनावों के बाद जहां दोनों ने साथ आने की कोशिश की थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। राज ठाकरे का यह बयान पुरानी कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ने का संकेत देता है, जबकि उन्होंने वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी कटाक्ष किया कि कई बाल ठाकरे द्वारा बनाए गए लोग अब अन्य दलों में हैं। कार्यक्रम में दोनों चचेरे भाइयों का एक साथ होना भावुक पलों से भरा रहा, जहां बाल ठाकरे की यादों को साझा किया गया।
Published on:
23 Jan 2026 10:36 pm
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