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महाराष्ट्र में खसरे का तांडव, अब तक 12 बच्चों की मौत; 3208 मरीजों में मिले लक्षण

महाराष्ट्र में खसरे का प्रकोप जारी हैं। 17 नवंबर तक महाराष्ट्र में खसरे के 500 से भी अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें ठाणे जिले के भिवंडी से 7 और नासिक के मालेगांव में 5 मामले सामने आए हैं। आंकड़ों की माने तो साल 2019 में पूरे राज्य में 153, 2020 में 193 और पिछले साल में 92 मामले सामने आए थे।

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Measles Outbreak

महाराष्ट्र में खसरे का प्रकोप जारी हैं। राज्य में बढ़ते खसरे के प्रकोप से लगातार कई बच्चों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में बच्चे अभी हॉस्पिटल में एडमिट हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। बीएमसी की जानकारी के मुताबिक मुंबई में अब तक कुल 3208 लक्षण के मरीज सामने आएं हैं, जिसमें से कुल 220 मरीजों का इलाज अभी चल रहा है।

मुंबई में बुधवार को खसरे के प्रकोप से 8 महीने के एक बच्चे की मौत हो गई। बच्ची की मौत हो जाने से शहर में इस बीमारी से मरनेवाले बच्चों की संख्या 12 पहुंच गई है। मुंबई में सबसे ज्यादा सोमवार को 24 मरीज पाए गए थे। वहीं, सबसे अधिक मरीज गोवंडी और कुर्ला से सामने आ रहे हैं। ज्यादातर बीमार बच्चों की उम्र 5 साल से भी कम है। यह भी पढ़े: महाराष्ट्र के राज्यपाल के बदलें तेवर, अब शिवाजी महाराज को लेकर कहीं यह बात

बता दें कि पूरे महाराष्ट्र में बढ़ रहे खसरे के मामले पर अधिकारियों का कहना है कि केवल मुंबई ही नहीं, बाहर भी खसरे के संक्रमण में बढ़ोतरी हो रही है। 17 नवंबर तक पूरे राज्य में इस बीमारी के 500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें ठाणे जिले के भिवंडी से 7 और नासिक के मालेगांव में 5 मामले सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में महाराष्ट्र में 153, साल 2020 में 193 और पिछले साल में 92 मामले सामने आए थे। वहीं, नवीं मुंबई के पनवेल में 3 मरीज और 15 मरीजों में खसरे के लक्षण पाए गए हैं, जिसके बाद पनवेल में 300 जगह टीकाकरण किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, जीवन स्तर की दयनीय स्थिति, बड़ा परिवार, स्वच्छता सुविधाओं, उचित हेल्थ सेवाओं की कमी, और पोषण की कमी, खराब प्रतिरक्षा, वैक्सीन की खुराक न देना और वैक्सीनेशन के प्रति अनिच्छा शहर में इस बीमारी के फैलने के कुछ प्रमुख कारण हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य निगरानी अधिकारी प्रदीप आवटे ने बताया कि यदि एक सप्ताह में संक्रमण के 5 संदिग्ध मामले सामने आते हैं, जिनमें से दो से ज्यादा की प्रयोगशाला परीक्षण में पुष्टि हुई हो, तो इसे प्रकोप कहा जाता है। राज्य बुलेटिन के मुताबिक, हेल्थ डिपार्टमेंट खसरा के लिए घर-घर निगरानी कर रहा है और अभियान के रूप में स्पेशल वैक्सीनेशन सेशन की सुविधा मुहैया की जा रही है।