
उद्धव ठाकरे और शरद पवार
No Confidence Motion: संसद में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 8 अगस्त से चर्चा शुरू होगी। जबकि इस पर 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देंगे। लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव के दौरान असली परीक्षा तो शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की होगी। क्योंकि दोनों दलों के विधायकों के बाद अब सांसदों की अयोग्यता का मामला भी उठ सकता है।
शिवसेना और एनसीपी में फूट पड़ने के बाद पहली बार संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है। जल्द ही लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग भी होगी. इसके लिए सभी दल व्हिप भी जारी करेंगे। जिस वजह से एनसीपी और शिवसेना के सांसदों के सामने मुश्किल खड़ी होगी। दरअसल दोनों दलों के एक धड़े मोदी सरकार के साथ है। जबकि दूसरा विरोध में खड़ा है। यह भी पढ़े-PM मोदी ने बढ़ाया हाथ... शरद पवार ने मुस्करा कर थपथपाई पीठ, बगावत से NCP मुखिया के बदले तेवर!
बीते एक साल में महाराष्ट्र की राजनीति में कई बार भूचाल आया हैं. एनसीपी और शिवसेना अपने इतिहास के सबसे बड़े बगावत का सामना कर रही है। दोनों दल दो खेमों में बंट गए है. जिस वजह से विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा गरमाया हुआ है। लेकिन सांसदों के मामले में एक साल बाद भी यह मुद्दा नहीं उठा था। लेकिन अब जब कांग्रेस समेत कई दलों ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया है तो सदन में इस पर चर्चा होगी और वोटिंग होगी। अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के समय व्हिप का उल्लंघन दसवीं अनुसूची के अनुसार अयोग्यता का आधार माना जायेगा।
हालांकि, शिवसेना और एनसीपी की स्थिति बेशक अलग है। लोकसभा में शिवसेना शिंदे गुट के पास 13 सांसद हैं जबकि उद्धव ठाकरे गुट के पास 6 सांसद हैं। जब शिवसेना में बगावत नहीं हुई थी तो विनायक राउत पार्टी नेता थे। वहीं शिंदे गुट ने राहुल शेवाले को पार्टी नेता नियुक्त किया है। लोकसभा अध्यक्ष ने शेवाले को पार्टी नेता और भावना गवली को व्हिप नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
लोकसभा में एनसीपी के पांच सांसद हैं. इनमें अजित पवार गुट में अकेले सुनील तटकरे हैं। बाकी 4 सांसद शरद पवार गुट के साथ बताये जा रहे हैं. पार्टी नेता सुप्रिया सुले हैं। हालांकि अभी तक एनसीपी के अजित गुट की तरफ से पार्टी के नए नेता की नियुक्ति का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष के सामने नहीं भेजा गया है। अत: ऐसी स्थिति में लोकसभा अध्यक्ष को यह निर्णय लेना होगा कि कौन सा व्हिप अधिकृत होगा।
शिवसेना के मामले में कानूनी लड़ाई का एक चरण ख़त्म हो चुका है। सियासी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में हुई, जिसके बाद विधायकों की अयोग्यता का मामला फिर विधानसभा स्पीकर के पास पहुंच गया। लेकिन एनसीपी में ये लड़ाई अभी भी धीमी गति से चल रही है। अभी तक न विधानसभा और न लोकसभा कही भी एनसीपी के पार्टी नेता, व्हिप को लेकर दावा किया गया है।
बता दें कि 2014 के बाद से मोदी सरकार के खिलाफ यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है। सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है इसलिए सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं है। माना जा रहा है कि विपक्ष का यह अविश्वास प्रस्ताव वोटिंग के दौरान गिर जाएगा, क्योंकि मौजूदा लोकसभा में बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत हासिल है। बीजेपी के पास 301 सांसद हैं। अगर इसमें एनडीए के उसके साथी दलों को जोड़ दिया जाये तो ये आंकड़ा 333 तक पहुंच जाएगा। वहीं विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन के पास केवल 142 सांसद हैं। लेकिन इसने शिवसेना और एनसीपी के सांसदों की टेंशन जरुर बढ़ा दी है।
अगर सांसद सदन में अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते है तो दलबदल अधिनियम के तहत उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है। इसलिए यह देखना अहम होगा कि शिवसेना और एनसीपी के सांसदों के बीच व्हिप किसका चलेगा, अगर वे इसका पालन नहीं करते हैं तो उनपर कार्रवाई होगी या नहीं। लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब अयोग्यता के मुद्दे पर संसद में सियासी घमासान शुरू होगा।
Published on:
03 Aug 2023 06:11 pm

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