
mormugao
मायानगरी मुंबई में शनिवार को इंडियन नेवी ने देश के सबसे विकसित और एडवांस जंगी जहाज 'मोरमुगाओ'को समुद्र में उतार दिया है। यह भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला अब तक का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत है। इस पर तैनात ब्रह्मोस मिसाइल से 300 किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है। नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा की मौजूदगी में समुद्र में उतारे गए 'मोरमुगाओ' एक एडवांस्ड डिस्ट्रोयर है, जिसका निर्माण मुंबई के मझगांव शिपयार्ड में पूरा किया गया।
विदित हो कि मोरमुगाओ मिसाइल विध्वंसक 'प्रोजेक्ट 15बी' श्रेणी के तहत निर्मित दूसरा जहाज है। इस श्रेणी के पहले पोत 'विशाखापट्नम' को पिछले साल अप्रैल में जलावतरण किया गया था। मोरमुगाओ तकनीकी तौर पर भारत का अब तक का सबसे एडवांस युद्धपोत है। भारत सरकार ने 2011 में प्रोजेक्ट 15-बी शुरू किया था, जिसके तहत अत्याधुनिक उपकरणों से लैस चार जंगी जहाज तैयार किए जाने थे। हालांकि मोरमुगाओ को नौसेना में सक्रिय रूप से शामिल होने में दो साल लगेंगे। दो सालों तक मोरमुगाओ का समुद्र में ट्रायल किया जाएगा।
आधुनिक हथियार और बराक-8 से लैस 'मोरमुगाओ'
युद्धपोत सेंसर्स के साथ अत्याधुनिक तकनीकी और हथियारों से लैस है। 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को टोह ले लेगा जहाज। यह 127 मिलीमीटर गन से लैस है, इसमें एके-630 एंटी मिसाइल गन सिस्टम भी है। साथ ही इस पर दो आरबीयू-6000 एंटी सबमरीन रॉकेट लांचर भी लगे हैं और इसका सोनार सिस्टम अलग और अत्याधुनिक है। खासियत यह कि बेहद खराब मौसम के दौरान भी इस पर नौसेना के हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकेंगे।
इसके अलावा इस पर शिप डाटा नेटवर्क नाम का एक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो लड़ाई के दौरान एक ही जगह पर सारा डाटा उपलब्ध कराएगा। युद्धपोत से बराक-8 लॉन्ग-रेंज जमीन से आसमान में मार करने वाली मिसाइल दागी जा सकती हैं। बराक-8 का निर्माण भारत और इसराइल ने मिलकर किया है। इसे दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइल तकनीकि में शुमार किया जाता है। इस तकनीकि से दुश्मन के एयरक्राफ्ट और सुपरसोनिक मिसाइल की टोह ली जा सकती है।
212 जहाज शामिल करने का लक्ष्य
इस परियोजना की कुल लागत 29 हजार 700 करोड़ है। मोरमुगाओ इसी श्रेणी का दूसरा जहाज है। सरकार इस परियोजना के जरिए स्वदेशीकरण के 68 फीसदी टारगेट को भी छूना चाहती है। इसके अलावा सरकार ने प्रथम स्वदेशी विमान वाहक पोत के लिए साल 2018 का लक्ष्य रखा है। भविष्य में सरकार की इन योजनाओं के तहत देश में पूर्ण रूप से निर्मित जंगी जहाजों को तैयार करने की योजना है। नौसेना का लक्ष्य 2027 तक अपने बेड़े में 212 जहाज करने का है।
बंदरगाह पर रखा गया नाम
गौरतलब है कि देश के सबसे शक्तिशाली इस जंगी जहाज 'मोरमुगाओÓ का नाम महाराष्ट्र में गोवा स्थित एक सबसे पुराने बंदरगाह पर रखा गया है। साथ ही इस पर पुर्तगालियों ने गोवा में एक किला व बाइसन भी बनाया था। किले पर बनी लोगों की फोटो यह बयां करती है कि यह 'मोरमुगाओÓ जहाज भी किले की तरह ही है, जिसे भेद पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुम्किन है। विदित हो कि बीजेपी सरकार के मौजूदा रंक्षी मंत्री मनोहर पार्रीकर का पैत्रक गांव भी गोवा ही है।
समुद्र में 7500 किमी. तक करेगा काम
मोरमुगाओ का वजन 7400 टन है और इसकी लंबाई 163 मीटर है। साथ ही इसमें चार अत्यंत शक्तिशाली गैस टर्बाइन इंजन लगे हैं, जो युद्धपोत को 30 नॉटिकल मील (56 किमी. प्रति घंटा) तक की रफ्तार देते हैं। इस श्रेणी के युद्धपोत को दुश्मन के राडार बहुत मुश्किल से पकड़ पाते हैं। इस युद्धपोत पर 50 नौसेना अधिकारी और 250 नाविक तैनात होंगे। ये समुद्र में एक बार उतरने के बाद 4000 नॉटिकल मील (7500 किमी.) तक काम करेगा।
ब्रह्मोस की रफ्तार 3,400 किमी प्रति घंटा
मोरमुगाओ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से भी लैस होगा। ब्रह्मोस से जमीन के अलावा समुद्र में 300 किमी दूर तक किसी लक्ष्य पर निशाना साधा जा सकता है। ब्रह्मोस की स्पीड 2.8 मैक है, जो कि दुनिया की तेज स्पीड वाली मिसाइल है। सुपरसोनिक गति पर ब्रह्मोस 3,400 किमी प्रति घंटा और 1 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ती है।
एक नजर में खास बातें-
1. इसे स्टेल्थ तकनीक से निर्मित होने की वजह से यह मिसाइल को चकमा देने में सक्षम है।
2. परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध के समय भी बचाव करने में पूर्णतय: सक्षम है।
3. यह 65 फीसदी देशी है और इसमें लगने वाले हथियार भी देश में ही बने हैं।
4. इस पोत में 8 ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई जाएंगी।
5. इसकी स्पीड 56 किमी प्रति घंटा है।
6. 75 हजार वर्ग किमी समुद्री क्षेत्र की निगरानी करने में सक्षम है।
7. इस पोत पर 50 अधिकारियों समेत 300 नौसैनिक तैनात रहेंगे।
8. इसमें एंटी-शिप्स ब्रहमोस, बराक 8 और निर्भय क्रूज मिसाइल को तैनात किया जाएगा।
9. चार यूके्रेनियन गैस टर्बाइन इंजन के चलते इसे 30 नॉट की रफ्तार मिलती है, जिसे दुश्मन के राडार बहुत मुश्किल से पकड़ पाते हैं।
10. युद्धपोत में मल्टी फंक्शन सर्विलांस थे्रट अलर्ट रडार एमएफ-स्टार लगा है, जो हवा में मौजूद कोसों दूर लक्ष्य को भी पहचान लेगा।
Published on:
17 Sept 2016 06:10 pm
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