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Mumbai News: बीएमसी में कंप्यूटर खरीदने का टेंडर भी होगा कैंसिल, करोड़ों के घोटाले का लगाया गया था आरोप

बीजेपी (BJP) के पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने बताया कि बीएमसी आईटी डिपार्टमेंट के ऑफिसर और ठेकेदार के बीच गठजोड़ इतना मजबूत है कि 25 करोड़ रुपए के कंप्यूटर खरीदने के लिए जारी टेंडर में 2018-2019 से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त लगा दी थी। यह शर्तें नियमों का साफ उल्लंघन हैं।

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BMC

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) प्रशासन द्वारा किसी प्रॉजेक्ट के लिए टेंडर जारी करना और उस पर घोटाले का आरोप लगने के बाद उसे कैंसिल करना अब आम बात हो गई है। इसी कड़ी में कंप्यूटर खरीदी के लिए जारी किया गया 25 करोड़ रुपए का टेंडर भी शामिल हो गया है। बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में टेंडर को कैंसिल करने की मांगकी गई है। जल्द ही चहल इस पर फैसला ले सकते हैं।

इस टेंडर में 7 करोड़ रुपए के स्कैम का आरोप लगाया गया था। बीएमसी ने कार्यालयों के लिए 3 हजार कंप्यूटर खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था, जिसमें एक कंप्यूटर के लिए 89 हजार रुपए तय किए गए थे। बीजेपी के पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया था कि वही प्रोडक्ट जीईएम पोर्टल पर तीन साल की वारंटी और सर्विस सेवाओं के साथ लगभग 58 हजार रुपए से 65 हजार रुपए में उपलब्ध है। यह भी पढ़े: Pune Crime: ऑनलाइन डेटिंग के चक्कर में बुर्जुग को लगा लाखों का चूना, केस हुआ दर्ज

इस प्रकार एक कंप्यूटर के पीछे बीएमसी को 20 हजार रुपए की हानि हो रही थीं। यह करीब 7 करोड़ रुपए का स्कैम है। कमिश्नर को लिखी चिठ्ठी में मिश्रा ने टेंडर को जल्द से जल्द कैंसिल करने और मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। जिसके बाद कमिश्नर चहल ने जॉइंट कमिश्नर अजित कुंभारे को मामले की जांच का निर्देश दिया था।

बीएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कुंभारे ने अपनी जांच रिपोर्ट में टेंडर में अनियमितता पाई है। उन्होंने कमिश्नर चहल को सौंपे रिपोर्ट में टेंडर को कैंसिल करने की सिफारिश की है। जल्द ही चहल इस संबंध में ऑर्डर जारी कर सकते हैं, जिसके बाद कंप्यूटर खरीदी के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा।

BMC को करोड़ों रुपये का नुकसान: बता दे कि बीएमसी के आईटी डिपार्टमेंट से साठगांठ कर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के कुछ विक्रेताओं ने पिछले कुछ सालों में बीएमसी को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। ऑफिसर्स और ठेकेदारों के गठजोड़ इतना गहरा है कि आईटी डिपार्टमेंट टेंडर की शर्तें, क्वॉलिफाइंग स्टैंडर्ड भी बदल देता है, ताकि उनकी चहेती कंपनियों को ही ये ठेका मिले। बीएमसी द्वारा पिछले 25 सालों में आईटी हार्डवेयर के लिए जारी सभी टेंडर का करीब 80 फीसदी ठेका एक ही कंपनी को मिला है।

विनोद मिश्रा ने पी नॉर्थ वॉर्ड के अंतर्गत मालाड में ब्यूटिफिकेशन के लिए जारी 24 करोड़ रुपए के टेंडर की विजिलेंस से जांच की डिमांड की है। बीएमसी कमिश्नर और जॉइंट कमिश्नर (विजिलेंस) को लिखे लेटर में विनोद मिश्रा ने कहा है कि कोई ठेकेदार 30 फीसदी की कम दर पर कैसे काम करने को तैयार हो सकता है। बीएमसी कैसे ठेकेदार को इतने कम रेट पर ठेका दे सकती है। इससे साफ पता चलता है कि ठेकेदार काम की क्वॉलिटी से समझौता करता हैं। िनोद मिश्रा की शिकायत पर उपायुक्त विश्वास शंकर राव ने शिकायत मिलने के बाद टेंडर को कैंसिल कर दिया है और वॉर्ड के असिस्टेंट कमिश्नर किरण दिघावकर को नया टेंडर जारी करने का आदेश दिया है।