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BMC Election: मुंबई-पुणे महानगरपालिका चुनाव पर सस्पेंस बरकरार! सुप्रीम कोर्ट में फिर टली सुनवाई

Mumbai Pune Election Date: स्थानीय निकाय चुनाव और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 04, 2023

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बीएमसी के ऑडिट के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

Supreme Court on OBC Reservation: महाराष्ट्र में पिछले कई महीनों से अधर में लटके स्थानीय निकाय चुनावों पर एक बड़ा अपडेट आया है। मुंबई महानगरपालिका (Mumbai Municipal Election) समेत अन्य नगर निगमों के चुनाव से संबंधित मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। लेकिन शीर्ष कोर्ट ने कोई नया आदेश जारी नहीं किया और एक बार फिर मामले की सुनवाई की तारीख टाल दी गई। इस वजह से बीएमसी चुनाव, पुणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

जानकारी के मुताबिक, स्थानीय निकाय चुनाव और ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। यदि सुनवाई नवंबर के अंत तक होगी, तो इस साल महानगरपालिका का चुनाव होने की संभावना बहुत कम है। यह भी पढ़े-BMC चुनाव: मुंबई में शिंदे बनाम ठाकरे की लड़ाई होगी तेज, उद्धव गुट को टक्कर देने के लिए प्लान तैयार!

मुंबई-पुणे समेत राज्यभर की कुल 11 नगर पालिकाओं का कार्यकाल पिछले साल 15 मार्च को समाप्त हो गया था। साथ ही पांच नगर पालिकाओं का कार्यकाल समाप्त हुए दो साल से अधिक समय हो गया है। वर्तमान में राज्य में 25 नगर पालिकाओं के चुनाव लंबित हैं। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक जिला परिषदों का कामकाज फिलहाल प्रशासकों के हाथ में हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सभी चुनाव इसलिए अटके हुए हैं, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

कोविड-19 के समय से ही सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि राज्य में नगर निकाय चुनाव कब होंगे। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में नगरपालिका चुनावों के भाग्य का फैसला करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई लगातार टल रही है। बीएमसी समेत राज्य के कई नगर निगमों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। अब प्रशासकों का छह माह का कार्यकाल भी पूरा हो गया है।

पिछले साल महाराष्ट्र में निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सीटों के आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। स्थानीय निकायों के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2022 को अपना फैसला सुनाया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण की अनुमति दी थी। लेकिन उसके बाद 92 नगर परिषदों का मामला कोर्ट में लंबित था। इसके बाद सत्ता में आई शिंदे सरकार ने महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) द्वारा स्थानीय निकायों में वार्डों और सदस्यों की संख्या बढ़ाने के फैसले को पलट दिया। इसके खिलाफ भी कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

इस बीच, महाराष्ट्र में लंबित निकाय चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो है।

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