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मुंबई के श्मशान भूमि की जानकारी डैशबोर्ड के पर

शहर में श्मसान भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है इसकी जानकारी पहले ही मिल जाएगी। और मृतक व्यक्ति को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले बीएमसी के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर जानकारी ली जा सकेगी।

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मुंबई के श्मशान भूमि की जानकारी डैशबोर्ड के पर

मुंबई के श्मशान भूमि की जानकारी डैशबोर्ड के पर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मुंबई.कोरोना से मृतकों के लोगों के अंतिम संस्कार में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए बीएमसी की ओर से डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बन जाने के बाद शहर में श्मसान भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है इसकी जानकारी पहले ही मिल जाएगी। और मृतक व्यक्ति को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले बीएमसी के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर जानकारी ली जा सकेगी।

गौरतलब है कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मसान भूमि में लंबी लंबी कतार लग रही है। घंटों इंतजार करने के बाद लोगों का नंबर आता है। इसलिए बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग और तकनीकी विभाग की ओर से डैशबोर्ड बनाने का कार्य किया जा रहा है। बीएमसी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक श्मसान भूमि में अंतिम संस्कार के लिए आई लाशों के आंकड़ा नियमित रूप से कंप्यूटर पर अपडेट करेगा। ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने का काम आखिरी चरण में है। जून माह के अंत तक कार्य पूरा हो जाएगा।

मुंबई में पारंपरिक तौर पर लकड़ी से जलाए जाने वाले 219 चिताओं पर 24 घंटे में 1,314 शव जलाये जा सकते हैं। लकड़ी से 24 घंटे में सिर्फ 6 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। मुंबई में 46 स्थानों पर पारंपरिक श्मसानभूमि सहित बिजली और गैस पर आधारित शवदाह गृह हैं। पारंपरिक पद्धति से दाह संस्कार के लिए मुंबई में 46 स्थानों पर 219 चिता बनी है। जबकि बिजली और गैस से शवदाह के 11 स्थानों पर 18 शवदाह गृह हैं। इस तरह मुंबई में कुल 237 चिताओं पर 24 घंटे में 1458 बॉडी का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। डैशबोर्ड क्रियान्वित होने के बाद शव जलाने संबंधित कोई भी जानकारी बीएमसी के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर तुरंत मिलेगी। इस हेल्पलाइन से पता चलेगा कि किस शवदाह गृह में जलाने के लिए कितने शव रखे गए हैं और कितने समय बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाएं।

कोरोना संक्रमित शवों को जलाने के लिए बिजली और गैस आधारित शवदाह गृह का उपयोग किया जाता है। एक शव जलाने के बाद डेढ़ घंटे तक उसे बंद रखना पड़ता है। दोबारा शवदाह से पहले भट्टी को ठंडा करने, साफ सफाई और सेनेटाइजेशन में समय लगता है। कभी कभी शवदाह गृह को रिपेयर के लिए बंद रखना आवश्यक होता है। बिजली अथवा गैस आधारित एक शवदाह गृह में 24 घंटे में 8 शव ही जलाए जा सकते हैं। मुंबई में इस तरह की कुल 18 चिताएं हैं। जिस पर 24 घंटे में 144 लोगों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है।