
शुरू हो सकती है नमामि गंगे की तरह नमामि चंद्रभागा मुहिम
सोलापुर. वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी की नगरी पंढरपुर के विकास की तैयारी है। चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित मंदिर परिसर को नया रूप देने और भक्तों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाने पर मंथन जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम जिलाधिकारी मिलिंद शंभरकर के नेतृत्व में काशी गई थी। वहां के अनुभवों के आधार पर पंढरपुर के विकास की योजना बनाई जाएगी। नमामि गंगे की तर्ज पर नमामी चंद्रभागा मुहिम शुरू हो सकती है। चंद्रभागा तट पर रोजाना आरती शुरू हो सकती है। एक अधिकारी ने कहा कि वाराणसी और पंढरपुर में कई समानताएं हैं। अधिकारियों ने कहा कि राजनीतिक-सामाजिक इच्छाशक्ति हो तो पंढरपुर का भी कायापलट हो सकता है। भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु हर साल पंढरपुर आते हैं।
कागजों पर सिमटी योजना
पंढरपुर के विकास के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान कई कदम उठाए गए थे। इसके तहत चंद्रभागा तट पर सीढिय़ां बनाई जा रही थीं। विठोबा मंदिर परिसर और आसपास की प्रमुख सड़कों के चौहरीकरण का काम शुरू किया गया। राजनीति इसमें रोड़ा बन गई। नदी किनारे न सीढिय़ां बन पाईं और न ही सड़कें चौड़ी हो पाईं। विकास योजनाएं कागजों पर सिमट गईं।
दूसरी कोशिश भी बेकार
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना सरकार (2014-19) के दौरान संत तुकाराम की जयंती पर पंढरपुर के लिए करोड़ों रुपए की योजना घोषित हुई। विकास कार्यों के लिए भूमि पूजा भी हुई। इससे आगे काम नहीं बढ़ा। आषाढ़ी, काॢतकी, चैत्री और माघी एकादशी पर दर्शन के लिए यहां भारी भीड़ होती है।
मंदिर के पास संकरा रास्ता
विट्ठल मंदिर जाने वाली सड़क संकरी है। इस कारण वाहन शहर के बाहर ही रोक दिए जाते हैं। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की समस्या भी है। पंढरपुर क्षेत्र में चार-छह लेन की सड़कें बनाई गई हैं। लेकिन, मंदिर जाने के लिए फोर लेन सड़क बनाने की योजना धूल फांक रही है।
Published on:
02 Sept 2022 09:10 pm
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