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Nashik News: कंबल में लेटाकर प्रेग्‍नेंट महिला को पहुंचाया गया हॉस्पिटल, दिल दहला देने वाला वीडियो हुआ वायरल

महाराष्ट्र के नासिक से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जहां सड़क की बहदाली के कारण गर्भवती महिला को कंबल पर लेटाकर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग एक गर्भवती महिला को कंबल पर लेटाकर उसे उठाकर पैदल हॉस्पिटल ले जा रहे हैं।

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Nashik

महाराष्ट्र के नासिक जिले को अभी भी मंत्रभूमि, यंत्रभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता अटूट है। देश भर से पर्यटक, भक्त नासिक आते हैं। इसलिए नासिक को स्मार्ट सिटी भी कहा जाता है। हालांकि, इसके बावजूद अक्सर यह देखा जाता है कि जिले के अधिकांश हिस्से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कभी शरीर के माध्यम से रोगी की यात्रा, कभी स्कूली बच्चों की बाढ़ के पानी से यात्रा, नासिक के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक रो रहे हैं कि यह जीवन-धमकी यात्रा कब रुकेगी।

देश में कई ऐसे इलाके हैं जहां सड़कों की बदहाली की वजह से आए दिन लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर अगर किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल ले जाना हो तो समय पर कोई साधन नहीं मिलता है और इस अवस्था में महिला को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती है। नासिक से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। यह भी पढ़ें: Pune Viral Shanta Pawar: पुणे की वायरल 'योद्धा आजी' को फिर से सड़कों पर क्यों उतरना पड़ा? सामने आई ये बड़ी वजह

बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जहां सड़क की बहदाली के कारण गर्भवती महिला को कंबल पर लेटाकर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग एक गर्भवती महिला को कंबल पर लेटाकर उसे उठाकर पैदल हॉस्पिटल ले जा रहे हैं। इस वीडियो को देखकर लोग हैरान हो गए हैं और यह खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

इससे पहले भी नासिक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी वायरल हो रहा था। उस वीडियो में स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे बाढ़ के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे थे। नासिक के आदीवासी बहुल इलाके भेगू सावरपाड़ा में छोटे बच्चे अपनी जान को खतरे में डालकर स्कूल जाने को मजबूर थे। आदिवासी रहवासियों का यह सफर पिछले कई सालों से ऐसा ही है। पानी के लिए भटकना, डोली में सफर करना, बाढ़ के पानी से नदी पार करना, ये सब यहां के आदिवासी भाइयों की दिनचर्या हो गई है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में वे मजबूती से आगे आ रहे हैं।