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NCP गणेश नाईक 52 नगरसेवकों के साथ कर सकते है भाजपा में प्रवेश

गणेश नाईक 52 नगरसेवकों के साथ कर सकते है भाजपा में प्रवेश नाईक पर नगरसेवक का दबाव नवी मुंबई की राजनीति में बड़े भूचाल की संभावना

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NCP गणेश नाईक 52 नगरसेवकों के साथ कर सकते है भाजपा में प्रवेश

रमाकांत पांडेय
नवी मुंबई: नवी मुंबई की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आने वाला है, बड़े पैमाने पर उथल-पुथल होने का संकेत मिल रहा है। ठाणे जिले का एक कद्दावर नेता अपनी लाव-लश्कर के साथ पार्टी का पाल्हा बदलने वाला है, इस तरह के संकेत मिलने पर पार्टी में अपना बर्चस्व खतरे में देख अपनी एक फौज लेकर महाराष्ट्र के आलाकमान के दरबार मे पहुंचकर दुहाई लगाई गई लेकिन नतीजा कुछ भी नही निकला, कहा तो यह जा रहा है कि नवी मुंबई में भाजपा की वर्तमान विधायिका की राह में अभी से कांटे नजर आने लगे हैं, इसलिए पूरी फौज लेकर मुख्यमंत्री के पास जाकर दुहाई की गुहार लगाई। परंतु भाजपा को नवी मुंबई महानगर पालिका की सत्ता का लोभ जो सता रहा है! ऐसे में भला कैसे इनकार किया जा सकता है। जी हाँ बात हो रही है राकांपा के कद्दावर नेता एवं ठाणे जिला के पूर्व पालकमंत्री गणेश नाईक की भाजपा में जानेे की अटकलें अब तेेेज हो गई है। राकांपा छोंड़ने को लेकर पिछले कई दिनों से चर्चाओं का बाजार गरम है। इसमे कोई संदेह नही कि गणेश नाईक भाजपा में अकेले ही शामिल होंगे, उनके साथ दो दर्जन से अधिक नगरसेवक भी उनके दिखाए हुए राह पर चल सकते हैं, और यदि ऐसा हुआ तो नवी मुंबई से एनसीपी का सफाया लगभग तय माना जा रहा है।

बता दें कि गणेश नाईक राकांपा के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं, पिछले 20 वर्षों से अपने बलबूते नवी मुंबई मनपा की सत्ता पर कब्जा जमाए हुए हैं, यह दिगर बात है कि पिछले विधानसभा में भाजपा की मंदा म्हात्रे उन्हें पटखनी देते हुए चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन मनपा पर आज भी उनका दबदबा कायम है। भाजपा की विधायिका मंदा म्हात्रे कभी गणेश नाईक के सानिध्य में नगरसेविका हुआ करती थी, लेकिन इन दोनों के बीच पिछले कई वर्षों से बर्चस्व को लेकर लड़ाई शुरू थी, इसी बीच मंदा म्हात्रे को भाजपा ने विधानसभा टिकट का ऑफर दिया, तो गणेश नाईक के खिलाफ बेलापुर विधानसभा सीट से मंदा म्हात्रे ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उस समय शिवसेना से विजय नाहटा, बीजेपी से मंदा म्हात्रे एवं एनसीपी से गणेश नाईक चुनावी मैदान में थे, लेकिन इन दोनों को पटखनी देते हुए मंदा म्हात्रे ने जीत का सेहरा अपने सिर पर बांध लिया। उसके बाद तो नवी मुंबई में भाजपा का सबसे बड़े नेता के रूप में मंदा म्हात्रे का नाम जुड़ गया। विधायक बनने के बाद मंदा म्हात्रे ने गणेश नाईक के खिलाफ शंखनाद कर दिया,और फिर एक-दूसरे के बीच बर्चस्व की जंग शुरू हुई। यहां पर यह कहना भी गलत नही होगा कि इस लड़ाई में गणेश नाईक अकेले पड़ गए और धीरे-धीरे चौतरफा उन्हें घेरते हुए उनके साम्राज्य पर प्रहार करने की कवायद शुरू की गई। इस बर्चस्व की लड़ाई में रेती बंदर स्थित ग्लास हॉउस को निशाना बनाया गया उसके बाद पावने में 1100 वर्ग मीटर भूखंड पर बने विशाल बावखलेश्वर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया, हालांकि कुल लगभग 32 हजार वर्ग मीटर में फैला मंदिर परिसर गणेश नाईक के कब्जे में था जो आज एमआईडीसी के आधीन है। इस तरह से नाईक की कमर तोड़ने की भरपूर कोशिश की गई। जबकि उनके बड़े सुपुत्र संजीव नाईक एनसीपी से सांसद रह चुके हैं, और छोटे पुत्र वर्तमान में राकांपा के एरोली विधानसभा से विधायक हैं। भले ही महाराष्ट्र में उनकी राजनैतिक धमक कम हुई हो लेकिन नवी मुंबई मनपा की सत्ता पर आज भी उनका ही बर्चस्व है। इसलिए आने वाले मनपा चुनाव में इस बार भाजपा का कमल खिले इस उद्देश्य के साथ राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गणेश नाईक को भाजपा की बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं ! अभी हाल ही में गणेश नाईक ने अपने सभी नगरसेवकों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए एक बैठक बुलाई थी, जिसमें नगरसेवकों का राय जानना चाहते थे, इस पर उपस्थित लगभग सभी नगरसेवकों ने हरी झंडी दे दिया है। इसलिए अब यह तय माना जा रहा है कि गणेश नाईक का भाजपा में जाना सुनिश्चित है। परंतु गणेश नाईक के भाजपा में जाने की खबर से मंदा म्हात्रे समर्थकों की नींद जरूर ***** हो गई है, यही कारण है कि उन्होंने अपने कई समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री के दरबार मे पहुंचकर गुहार लगाई थी! यह बात तो तय है कि गणेश नाईक के भाजपा में शामिल होने से नवी मुंबई महानगर पालिका पर भाजपा का कमल खिल सकता है, लेकिन मंदा म्हात्रे समर्थकों का अस्तित्व जरूर खतरे में पड़ सकता है?