
movie review pagalpanti पागलपंती है
अरुण लाल
बडे बजट और बड़े कलाकारों के साथ आई फिल्म पागलपंती बे सिर पैर की दौड़ती-भागती कॉमेडी फिल्म है। इसमें न अच्छा निर्देशन है, न अच्छे गाने। कोरियोग्राफी भी बेहद लचर नजर आई है। बडे बजट के बावजूद फिल्म देखने गए लोग सिनेमा घरों में फोन पर व्यस्त नजर आएंगे। सौरभ शुक्ला जैसे कलाकार को भी खराब कहानी और लचर निर्देशन ने ऊबाऊ बना दिया है।
कहानी
ऐसा लगता है कि कई फिल्मों की कहानी जोड़ कर एक कहानी बनाने का प्रयास किया गया है। यह अनलकी युवक राज किशोर (जॉन अब्राहम) और उसके दोस्त जंकी (अरशद वारसी) व चंदू (पुलकित सम्राट) की कहानी है। जिनका हर काम गड़बड होता है। इसी बीच उनसे गैंगस्टर राजा (सौरभ शुक्ला) और वाईफाई भाई (अनिल कपूर) की करोडों का नुकसान हो जाता है। नुकसान की भरपाई करने के लिए पागलपंती की शुरुआत होती है, जो सभी की जिंदगी में तबाही लेकर आती है। इस कहानी में नीरव मोदी को भी प्लांट किया गया है। जो मुख्य विलेन है।
व्यू:
कहानी में हर तरफ बे सिर पैर की बातें हैं, एक बच्चा भी इस कहानी में 100 गलतियां निकाल दे। पूरी तरह से बिना सोचे-समझे फिल्म की कहानी लिखी गई है। 2घंटे40 मिनट की यह लंबी फिल्म पूरी तरह से बिखरी हुई है। कहीं किसी बात का तारतम्य नहीं दिखता। डायलॉग ने भी कोई कमाल नहीं किया है। हर सीन के बाद अगला सीन आपको परेशान करता नजर आएगा। हर बार की तरह जॉन ने वही एक तरह की एक्टिंग की है। गैंगस्टर की भूमिका में अनिल कपूर और सौरभ शुक्ला ने ही जान डालने का असफल प्रयास किया है। वहीं अरशद वारसी मजाकिया अंदाज फिल्म को बचा नहीं पाया। पुल्कित सम्राट ने भी ठीक काम किया दिखता है।
तीनों एक्ट्रेस को सुंदर दिखाया गया है, पर उन्होंने अपने लुक के अलावा दशर्कों के लिए कुछ किया नहीं लगता है। फिल्म में नीरज मोदी का किरदार रहे (इनामुलहक) भी कुछ जमे नहीं हैं। यह मुख्य विलेन है, जिसे बिजनेसमैन नीरव मोदी बनाया गया है। फिल्म में ये कैरेक्टर बेकार सी गुजराती बोलता है। निर्देशक अनीस बज्मी और सह-लेखकों ने प्रोडूयूसर के पैसे को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कई फिल्मों को जोड़कर एक साथ सब कुछ दिखाने की चाह में लोगों को हंसाने की बेकार कोशिश है। फिल्म की स्क्रिप्ट, निर्देशन, डायलॉग और गाने यहां तक की अदाकारी भी बेहद कमजोर है। कहीं भी जबरन गाने डाले गए लगते हैं। बड़े कलाकारों के साथ बड़े बजट में बनी इस फिल्म को देखने की हिम्मत करना पागलपंती ही कहलाएगा।
Updated on:
22 Nov 2019 02:12 pm
Published on:
22 Nov 2019 02:08 pm
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