Patrika Expose : ओशिवारा में सवा दो एकड़ भूखंड घोटाले का मामला

Patrika Expose : ओशिवारा में सवा दो एकड़ भूखंड घोटाले का मामला
Patrika Expose : ओशिवारा में सवा दो एकड़ भूखंड घोटाले का मामला

Rohit Kumar Tiwari | Updated: 30 Aug 2019, 09:22:08 AM (IST) Mumbai, Mumbai, Maharashtra, India

  • पत्रिका एक्सपोज के बाद गठित की गई समिति
  • अधिकारियों पर गिरेगी गाज
  • बचने के लिए अधिकारी आकाओं के यहां हुए शरणागत

- रोहित के. तिवारी
मुंबई. महानगरी के सबसे पॉश क्षेत्र अंधेरी के समीप ओशिवारा में सवा दो एकड़ (करीब 9500 वर्ग मीटर) भूखंड घोटाले को लेकर अब म्हाडा समेत मंत्रालय तक के अधिकारियों में खलबली मच गई है। मंत्रालय के गृह निर्माण विभाग ने म्हाडा को जांच का आदेश जारी कर दिया है। म्हाडा अध्यक्ष उदय सामंत ने इस पर जांच समिति गठित कर दी है।
फर्जी कागजात के आधार पर म्हाडा को करीब दो हजार करोड़ से भी अधिक की चपत लगाने की जांच अब कोंकण बोर्ड सीओ माधव कुसेकर की अध्यक्षता में होगी। भूखंड का मालिकाना हक रखने वाले करीब 21 रहिवासियों को इससे न्याय मिलने की आस जगी है। इधर, जांच की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही म्हाडा के अधिकारी खुद को पाक साफ साबित करने की जुगत भिड़ाने लगे हैं, आकाओं के यहां दरबार लगाना शुरू हो चुका है। पत्रिका ने 10 अगस्त को 'फर्जी दस्तावेजों की आड़ में महाडा को लगा दी दो हजार करोड़ की चपत' खबर प्रकाशित की थी। इस मामले में लगातार कई खबरें प्रकाशित होने के बाद कई दूसरे फर्जीवाड़े भी उजागर होते चले गए। 'पत्रिका एक्सपोज' के लगातार फॉलोअप के बाद वर्षों पुराने इस हजारों करोड़ के भूखंड घोटाले मामले पर म्हाडा समेत मंत्रालय ने गंभीरता से संज्ञान लिया और कार्रवाई ले कर गरीब और निम्न मध्यवर्ग रहिवासियों में न्याय की आस जगा दी है।

फर्जी कागजात से बिल्डर ने हड़पी थी 9500 वर्ग मीटर जमीन...
शाहिद खान बिल्डर की ओर से ओशिवारा के सर्वे नंबर 33 का हिस्सा नंबर 8 के अलावा भी अवैध कागजात और फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी के बलबूते सीटीएस नंबर 9, 33/10, 35/4, सीटीएस नंबर 13 और 15 समेत कुल 9500 वर्ग मीटर जमीन हड़पी गई। साथ ही वहां बिल्डर और अधिकारियों की साठ-गांठ से मर्करी एवं मिलेनियम ए व बी विंग में दो गगनचुम्बी आलीशान इमारत का निर्माण भी धड़ल्ले से करा दिया गया। म्हाडा के ही अधिकारियों ने प्राधिकरण को लगभग दो हजार करोड़ से भी ज्यादा रुपए का नुकसान कराया है। हैरत की बात तो यह है कि इस पूरे प्रकरण में जहां बॉम्बे हाई कोर्ट ने भूखंड के वरिसदार झुबेर इब्राहिम, हुमायून अब्दुल रजाक, मसूद अब्दुल रजाक समेत मालिकाना हक रखने वाले कुल 21 लोगों के पक्ष में फैसला सुनाया है।संबंधित विभाग के मंत्री के अलावा म्हाडा प्राधिकरण के अध्यक्ष ने गंभीर मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं, पर घोटाले में लिप्त अधिकारियों पर अभी एफआईआर दर्ज होनी बाकी है।


सवालों से बच रहे अधिकारी
जमीन के वारिसदारों के केस की पैरवी कर रहे वकील विद्यासागर साखरे की माने तो बिल्डर और म्हाडा अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस पूरे महाघोटाले में अब तक की तहकीकात में मुख्य रूप से म्हाडा के बांद्रा डिवीजन के कार्यपालक इंजीनियर कमलाकर सुरवाड़े, कार्यकारी अभियंता भूषण देसाई और म्हाडा स्पेशल प्लानिंग अथॉरिटी के कार्यपालक इंजीनियर सेठ की संलिप्तता का पता चलता है। यही वजह है कि 26 जून 2019 को मिलेनियम को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के नाम पर पार्ट ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया था। 'पत्रिका एक्सपोज़' की खबर पर म्हाडा के इन तीनों अधिकारी सवालों से बचते नजर आ रहे हैं।


संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय
फिलहाल मैं अवकाश पर चल रहा हूं। इस मामले में समिति का अध्यक्ष मुझे बनाया गया और ड्यूटी ज्वाइन करते ही महीने भर में इस गंभीर मामले में जांच की रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। उसके बाद फर्जी कागजात के दम पर हुए इस हजारों करोड़ के भूमि घोटाले पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मामला सही पाए जाने पर जांच में संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
- माधव कुसेकर, सीओ, कोंकण बोर्ड म्हाडा

होगी ताबड़तोड़ कार्रवाई...
यह वर्षों पुराना बहुत ही पेंचिदा और गंभीर मामला है। इस पर सिर्फ मेरी तरफ से कोई जांच हो, ये उचित नहीं होगा, जबकि 'पत्रिका' की ओर से एक्सपोज की गई खबर के बाद से मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए इस घोटाले के संबंध में उचित और पारदर्शी कार्रवाई के लिए एक समिति का गठन किया गया है। वहीं रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अधिकारियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जाएगी।
- उदय सामंत, अध्यक्ष, म्हाडा

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