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अगड़े महाराष्ट्र के एक गांव में लोग करते हैं बहु-विवाह

मजबूरी के नाम कुप्रथा: डेंगणमाल में हर शख्स के पास दो पत्नियां, कुछ ने तो की हैं चार-पांच शादियांपानी के लिए जद्दोजहद, पहली पत्नी संभालती है घर-परिवारपानी के इंतजाम की जिम्मेदारी संभालती है दूसरी

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अगड़े महाराष्ट्र के एक गांव में लोग करते हैं बहु-विवाह

अगड़े महाराष्ट्र के एक गांव में लोग करते हैं बहु-विवाह

मुंबई. लिंगानुपात में गिरावट के चलते जहां हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में अविवाहित पुरुषों की संख्या बढ़ रही, वहीं महाराष्ट्र के डेंगणमाल गांव के लोग आज भी कई शादियां करते हैं। इस गांव के प्रत्येक पुरुष के पास कम से कम दो पत्नी हैं। लगभग 500 लोगों की आबादी वाले गांव में कुछ ऐसे शख्स भी हैं, जिन्होंने चार से पांच शादी की है। कानूनन भारत में बहु विवाह की इजाजत नहीं है। स्थानीय लोग एक से ज्यादा शादी को मजबूरी बताते हैं। आजादी के 75 साल बाद भी ठाणे जिले की शाहापुर तहसील के इस गांव में पेयजल उपलब्ध नहीं हैं। कई किमी दूर स्थित बांधों से पीने-नहाने का पानी लाना पड़ता है। ज्यादातर पुरुष खेतों में काम करते हैं। पहली पत्नी बच्चों की देखभाल, खाना बनाने के साथ घर-गृहस्थी संभालती है। दूसरी पत्नी को यहां पानी बाई कहते हैं। सुबह से लेकर शाम तक पानी बाई पेयजल के इंतजाम में लगी रहती हैं।

नहीं पहुंचा नल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पानी की समस्या का समाधान करने का भरोसा दिया गया। सरकारें आती-जाती रहीं। मलाल यह कि समस्या से निजात नहीं मिली। गांव के लोग आज भी नल कनेक्शन के लिए तरस रहे हैं। इस कारण पानी के लिए जद्दोजहद जारी है। उबड़-खाबड़ पथरीली जमीन पर बसा यह गांव चकाचौंध से भरपूर आर्थिक राजधानी मुंबई से तकरीबन 185 किमी दूर है।

लगते हैं 12 घंटे
डेंगणमाल के लोगों की प्यास विहिर व भातसा बांध से बुझती है। ये दोनों बांध गांव से कई किमी दूर है। पानी बाई पैदल ही बांधों पर जाती हैै। वहां से घड़े-मटके में भर कर पानी लाती हैं। घर व बांध के बीच वे कई चक्कर लगाती हैं। पानी के इंतजाम में ही 12 घंटे निकल जाते हैं। घर का दूसरा काम करने के लिए उनके पास समय ही नहीं बचता।

गर्मी में ज्यादा दिक्कत
गर्मी के मौसम में ज्यादा दिक्कत होती है। पथरीले रास्ते में चिलचिलाती धूप असहनीय होती है। फिर भी पानी बाई जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़तीं। बारिश और सर्दी के मौसम में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।

पहली शादी ही वैध
बहु विवाह को मजबूरी मानने वाले इस गांव के पुरुष पहली शादी को ही वैध मानते हैं। पहली पत्नी को पूरे अधिकार मिलते हैं। शादी के बाद पति पर पानी बाई का कोई अधिकार नहीं होता। पति-पत्नी की तरह नहीं रहते, लिहाज बच्चे नहीं होते हैं। ज्यादातर पानी बाई विधवा या परित्यक्ता सिंगल मदर होती हैं। पानी बाई को रहने के लिए घर में अलग कमरा दिया जाता है।