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कर्ज के बदले किसानों की किडनी बेंचने वाला गिरोह पकड़ा 

गरीबों को साहूकार पहले कर्ज देकर जाल में फंसाता था, फिर कर्ज अदा नहीं करने पर किडनी तस्करों का ये रैकेट पैसे की लालच देकर किडनी निकाल लेता था।

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Vikas Gupta

Dec 04, 2015

International kidney racket

International kidney racket

मुंबई। महाराष्ट्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। महाराष्ट्र पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कर्ज के बदले बेबस किसानों और मजदूरों के शरीर से किडनी निकाल कर बेच रहा था। महाराष्ट्र के अकोला के बेबस गरीब किसानों और मजदूरों के साथ ऐसा हो रहा है। कर्ज के बदले किडनी लेने वाले ऐसी ही एक गिरोह को अकोला पुलिस ने दबोचा है।

इस गिरोह में एजेंट के साथ-साथ कर्ज देने वाला साहूकार भी होता था, जो कर्ज के बोझ तले दब चुके गरीब किसान और मजदूरों से कर्ज के एवज में किडनी का सौदा करते थे। किडनी देने पर साहूकार कर्ज माफ कर देता है और नहीं देने पर साहूकार कर्ज के लिए दबिश इस कदर बनाता है कि किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। 50 साल की शांता बाई ने साहूकार से 30 हजार कर्ज लिया था, लेकिन ब्याज तक चुका नहीं पाई और किडनी गंवानी पड़ी। 40 साल के देवानंद कोमलकर की किडनी भी साहूकारों के कर्ज की बलि चढ़ गई।

ऐसे हुआ पर्दाफाश
गरीबों को साहूकार पहले कर्ज देकर जाल में फंसाता था, फिर कर्ज अदा नहीं करने पर किडनी तस्करों का ये रैकेट पैसे की लालच देकर किडनी निकाल लेता था। इस रैकेट के तार श्रीलंका तक जुड़े हुए हैं, क्योंकि किडनी निकालने के लिए लोगों को कोलंबो ले जाया जाता था। जहां से फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत तय होती थी। इस गिरोह में सब कुछ सेट था। कोई बेबस लोगों को शिकार बनाता था तो कोई नागपुर में जांच की व्यवस्था करता था तो कोई श्रीलंका का पासपोर्ट बनाकर किडनी निकलवाने के लिए भेजता था। पुलिस ने तीन पासपोर्ट भी इन लोगों के पास से जब्त किए हैं।

अंग की तस्करी से सब हैरान
मानव अंग के तस्करी के इस खेल की खबर से सभी हैरान हैं। सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं विपक्ष का आरोप है की यह एक बड़ा रैकेट हो सकता है, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहा है, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि कुछ नेताओं ने भी अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट कराया है।

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