
उल्हास नदी की सफाई शुरू
उल्हासनगर. प्रशासन ने आखिर उल्हास नदी की सफाई कार्य शुरू किया है। नदी में जहरीले पौधे और कचरे का ढेर जमा है, पर महीनों से प्रशासन की नजर में यह नहीं आ रहा था। पिछले दिनों पत्रिका ने जब इसकी खबर प्रकाशित की तो तंत्र जागा और फिर इसकी सफाई शुरू कर दी है। प्रशासन का दावा है कि एक महीने के अंदर नदी के अंदर से कचरा और अन्य गंदगी निकाल ली जाएगी। इसके लिए जेसीबी मशीन लगाई गई है। नदी की गंदगी की वजह से लोगों के घरों में गंदा और दूषित पेयजल जाने से इस क्षेत्र में बीमारी फैलनी शुरू हो गई थी।
जलशुद्धिकरण शहाड स्थित उल्हास नदी में जेसीबी मशीन से जलपर्णी (जहरीले पौधे) निकालने का अभियान शुरू किया गया है। इंजीनियर कार्लटन रिबेरो ने बताया कि लगभग पांच किलोमीटर तक फैली यह जलपर्णी जिसे जलकुंभी भी कहते हैं, जहरीले पौधों की श्रेणी में आता है। यह पानी से ऑक्सीजन सोख लेती है, जिससे पानी से बदबू आना शुरू हो जाता है। अब इसे जेसीबी मशीन से निकाला जाएगा। प्रशासन ने एक निजी कंपनी को यह काम सौंपा है।
इमारतों का गंदा पानी सीधे नदी में
म्हारल गांव स्थित रिजेंसी एंटालिया और ठारवानी हाइट्स इन दो बड़ी इमारतों के बीच से निकलने वाला नाला, जिससे इन दोनों इमारतों के साथ अन्य कई इमारतों के घरों का मलमूत्र बहाया जाता है, वह सीधा उल्हास नदी में बिना किसी प्रक्रिया के पहुंचता है।
यह नाला उल्हास नदी से जहां जाकर मिलता है, वहां से 40 मीटर की दूरी पर सेंचुरी का पंपिंग स्टेशन और 60 मीटर की दूरी पर एमआईडीसी (उल्हासनगर) का पंपिंग स्टेशन, 80 मीटर की दूरी पर कल्याण का पंपिंग स्टेशन और 100 मीटर की दूरी पर प्राधिकरण का जल शुद्धिकरण केंद्र स्थित है। जहां से पानी फिल्टर कर उल्हासनगर मनपा, कल्याण डोम्बिवली मनपा और अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है। नदी की गंदगी पर कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई तो प्रशासन ने जल्द ही जल शुद्धिकरण किए जाने का हलफनामा दिया परन्तु फिर भी उदासीनता
देखी गई।
Updated on:
03 May 2019 05:45 pm
Published on:
03 May 2019 05:44 pm
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