मुंबई

ढाई घंटे कोर्ट में खड़ी रही प्रज्ञा तो बोली, साफ कुर्सी तो दे दो

2008 मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई 11 साल पुराने मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है।

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Jun 07, 2019
अदालत में पेश होते हुईं भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. मध्य प्रदेश की भोपाल सीट से नवनिर्वाचित भाजपा सांसद एवं 2008 के मालेगांव बम विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर शुक्रवार को विशेष अदालत में हाजिर हुईं। सांसद बनने के बाद प्रज्ञा ठाकुर पहली बार विशेष एनआईए की अदालत में उपस्थित हुईं। 11 साल पुराने मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है। विशेष अदालत ने मालेगांव विस्फोट मामले के सभी आरोपियों को आदेश दिया था कि वे हर सप्ताह कम से कम एक दिन सुनवाई में उपस्थित हों।
मालेगांव विस्फोट मामले में आक्टूबर में आरोप लय किए गए थे। उसी समय ठाकुर अदालत में पेश हुई थीं। हालांकि सोमवार को याचिका दायर कर प्रज्ञा ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें इस सप्तार पेशी से छूट दी जाए। विशेष एनआईए कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि केवल ठोस कारण दिए जाने पर ही पेशी से छूट मिलेगी। ठाकुर ने इस आधार पर छूट मांगी थी कि उन्हें संसद में अपने निर्वाचन से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी हैं, लेकिन अदालत ने कहा कि मामले के इस चरण में उनकी मौजूदगी आवश्यक है।
विशेष कोर्ट मालेगांव विस्फोट मामले में गवाहों की गवाही दर्ज कर रही है। मामले में ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सात लोग आरोपों का सामना कर रहे हैं। मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के पास हुए बम विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे।

बैठने के लिए अच्छी कुर्सी तो दें
सुनवाई के बाद बाहर आईं साध्वी प्रज्ञा ने खराब कुर्सी मिलने पर नाराजगी जताई। प्रज्ञा ने कहा कि जो कुर्सी बैठने के लिए मिली थी, वह बेहद गंदी और छोटी थी, जिस पर बैठा नहीं जा सकता था। प्रज्ञा कोर्ट में 2.45 बजे पहुंचीं। कोर्ट ने उन्हें कुर्सी पर बैठने की अनुमति दी, लेकिन उन्होंने बैठने से इंकार कर दिया। पूरी सुनवाई के दौरान प्रज्ञा एक खिड़की के पास सहारा लेकर खड़ी रहीं और जैसे ही शाम 5.15 बजे जज कोर्ट से बाहर निकले वे चीखने लगीं। साध्वी ने चीखते हुए कहा, यदि बुलाया है तो कोर्ट में बैठने के लिए उचित स्थान दें। जब तक सजा नहीं होती है, तब तक मुझे बैठने का अधिकार है। जब सजा हो जाए तो मुझे फांस पर चढ़ा दीजिए।

Updated on:
07 Jun 2019 09:50 pm
Published on:
07 Jun 2019 07:05 pm
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