
CM Eknath Shinde
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास अधिनियम (MHADA) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब मुंबई शहर में रुके हुए उपकर (सेस) भवनों के पुनर्विकास का मार्ग दोबारा खुल गया है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के लगातार कोशिश इसके लिए सफल रहे हैं। डिप्टी सीएम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया है। अब इस नए कानून के मुताबिक म्हाडा के जरिए अलग-अलग वजहों से अधूरे/रुके हुए सेस (उपकर) निर्माण परियोजनाओं को टेक ओवर करना और उनका पुनर्विकास करना संभव होगा।
फिलहाल मुंबई में 56 से ज्यादा उपकर भवनों का पुनर्विकास रुका हुआ था या अधूरा था। इसलिए, म्हाडा सीधे ऐसी इमारतों को अपने कब्जे में ले सकती है और उनका पुनर्विकास कर सकती है। इसके साथ ही अगर मुंबई नगर निगम किसी उपकर भवन को खतरनाक एलान करता है, तो उस इमारत या भवन के मालिक को पहले पुनर्विकास का अवसर दिया जाएगा। यह भी पढ़े: एनसीपी नेता का दावा, महाराष्ट्र के कुछ गांवों ने गुजरात में विलय की मांग की
अगर वह 6 महीने के भीतर पुनर्विकास प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करता है, तो किरायेदार को दूसरा अवसर दिया जाएगा। यदि वे भी इन दोनों कोशिशों के सफल न होने के बाद 6 महीने के अंदर पुनर्विकास का प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो म्हाडा भवनों का कब्जा ले सकती है और उनका पुनर्विकास कर सकती है। यह पुनर्गणना करने वाले के 25 फीसदी या बिक्री इकाई के निर्मित इलाके के 15 फीसदी, जो भी ज्यादा हो, की दर से संबंधित भवनों के मालिक या भूमि के मालिक को मुआवजे का प्रावधान करता है।
बता दें कि लिहाजा कई सालों से रुके हुए उपकर भवनों के पुनर्विकास की राह अब पटरी पर आएगी। इस साल 28 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे लंबित पुनर्विकास योजनाओं, लंबित अदालती मामलों के सभी डाक्यूमेंट्स, सभी फोटो केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपे। इसके लिए डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से लगातार आग्रह भी किया था। अब जबकि विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, मुंबई में उपकर भवनों के पुनर्विकास को बढ़ावा मिलेगा।
Updated on:
03 Dec 2022 03:37 pm
Published on:
03 Dec 2022 03:36 pm
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