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पुणे: 400 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड मामले में ईडी की छापेमारी जारी, जानिए पूरा मामला

Pune Crime News: सेवा विकास बैंक में गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद बीते साल अक्टूबर महीने में RBI ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। तब केंद्रीय बैंक ने कहा था कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और न ही उसके पास आमदनी की संभावनाएं हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 27, 2023

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पिंपरी-चिंचवड में ईडी का छापा

Seva Vikas Cooperative Bank Loan Fraud: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पुणे जिले में छापेमारी शुरू की है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन देने के मामले में यह कार्रवाई चल रही है। पिंपरी-चिंचवड में सेवा विकास को-ऑपरेटिव बैंक (Seva Vikas Cooperative Bank) के पूर्व अध्यक्ष अमर मूलचंदानी के ठिकानों पर छापेमारी चल रही है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम मूलचंदानी से जुड़े कुछ जगहों पर कार्रवाई कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद बीते साल अक्टूबर महीने में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पुणे के पिंपरी स्थित इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। तब केंद्रीय बैंक ने कहा था कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और न ही उसके पास आमदनी की संभावनाएं हैं, ऐसे में उसका लाइसेंस रद्द किया जा रहा है। इसके तहत 10 अक्टूबर 2022 के कारोबारी घंटों के बाद सहकारी बैंक का कारोबार रोक दिया गया। यह भी पढ़े-पुणे: HIV पॉजिटिव पति ने पत्नी को मारा चाकू, सामने आई चौंका देने वाली वजह; होटल में नाबालिग से रेप

आरोप है कि सेवा विकास को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशकों ने 124 फर्जी लोन प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इस मामले में करीब 430 करोड़ रुपये अनियमित तरीके से विभिन्न व्यक्तियों और संस्थानों को दिए गए। यहां तक की उन व्यक्तियों को भी लोन दिया गया जो लोन लेने के पात्र तक नहीं थे। लोन देते समय नियमों और मानदंडों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

इससे बैंक को भारी नुकसान हुआ। जिसका खुलासा 2020 में लोन ऑडिट में हुआ था। जांच में कई घोटाले सामने आये। पिंपरी पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज किया था। उस समय अमर मूलचंद सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मूलचंदानी कुछ महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया। उसके बाद आज ईडी ने उसके परिसरों पर छापा मारा।

वर्तमान में आरबीआई ने बैंक के ऊपर एक प्रशासक नियुक्त किया है। बैंक में बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के रुपये फंसे हुए हैं। हालांकि बैंक द्वारा जो आंकड़े दिए गए थे उनके अनुसार उसके 99 प्रतिशत जमाकर्ता जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अपनी पूरी जमा राशि पाने के पात्र हैं।

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