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Pune Bypoll: गिरीश बापट की पुणे सीट से किसे मिलेगा लोकसभा का टिकट? 3 नामों पर बीजेपी कर रही मंथन

Girish Bapat: गिरीश बापट पिछले डेढ़ साल से बीमारी से जूझ रहे थे। इलाज के दौरान भी वह पार्टी के कार्यक्रमों से जुड़ते थे। बापट आरएसएस के स्वयंसेवक थे। वह कस्बा पेठ विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए थे। जबकि वह 2019 में पुणे से सांसद बने।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Apr 09, 2023

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बीजेपी सांसद गिरीश बापट का पुणे के अस्पताल में निधन

Pune Lok Sabha By-Election: महाराष्ट्र के पुणे जिले से बीजेपी सांसद और दिग्गज नेता गिरीश बापट का पिछले महीने 73 साल की उम्र में निधन हो गया। गिरीश बापट के निधन से खाली हुई पुणे लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है। पुणे में बीजेपी को मजबूत आधार देने वाले बापट के निधन से पुणे लोकसभा क्षेत्र की सीट रिक्त हो गई है। अब इस सीट पर उपचुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक, गिरीश बापट की खाली सीट पर उपचुनाव के लिए बीजेपी तीन नामों पर चर्चा कर रही है। जानकारी सामने आ रही है कि इन तीन लोगों में से किसी एक को यहां से उम्मीदवार बनाया जायेगा। पुणे लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए बीजेपी पुणे के पूर्व मेयर मुरलीधर मोहोल और पूर्व सांसद संजय काकडे के अलावा अपने दिवंगत नेता की बहू स्वरदा बापट के नामों पर मंथन कर रही है। यह भी पढ़े-PM मोदी ने बीजेपी सांसद गिरीश बापट के निधन पर जताया दुख, राज्य से लेकर केंद्र तक के नेता हुए भावुक

वहीं दूसरी ओर महाविकास आघाडी (MVA) के नवनिर्वाचित विधायक रविंद्र धंगेकर को यहां से विपक्ष अपना प्रत्याशी घोषित कर सकता है। हालांकि इसको लेकर भी शिवसेना उद्धव गुट-एनसीपी-कांग्रेस में चर्चा चल रही है।

बीजेपी की ओर से पुणे लोकसभा सीट से गिरीश बापट की बहू स्वरदा बापट या बेटे गौरव बापट, पुणे के पूर्व मेयर मुरलीधर, पुणे के पूर्व सांसद संजय काकडे और इसके अलावा मेधा कुलकर्णी और शहर अध्यक्ष जगदीश मुलीक के नाम की चर्चा हो रही थी।

मालूम हो कि गिरीश बापट पिछले डेढ़ साल से बीमारी से जूझ रहे थे। इलाज के दौरान भी वह पार्टी के कार्यक्रमों से जुड़ते थे। गिरीश बापट आरएसएस के स्वयंसेवक थे। उन्होंने जनसंघ से राजनीति में प्रवेश किया था। नगरसेवक के रूप में शुरुआत करने वाले बापट ने 1995 में पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा और 2014 तक लगातार पांच बार विधायक चुने गए। वह 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद पहली बार सांसद बने।

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