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पुणे: ‘मेरे बेटे की आंखें ही क्यों, पूरा शरीर ले लो!’ पिता के महादान ने 5 लोगों को दिया नया जीवन

Organs Donation Maharashtra : हादसे के तुरंत बाद युवक को पुणे के सह्याद्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन किया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। पिता ने कहा, "मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वह किसी और के अंगों के रूप में जीवित रहेगा।"

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 11, 2026

Organ Donation Pune

पिता के फैसले से 5 लोगों को मिली नई जिंदगी (Patrika Photo)

बेटे की मौत का गम हर माता-पिता के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है, लेकिन महाराष्ट्र में एक पिता ने इस असहनीय दुख के बीच इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर जगह सराहना हो रही है। बीड जिले के राक्षसभुवन निवासी 21 वर्षीय संग्राम रमेश गाडे के निधन के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। इस फैसले से अब पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने वाला है। संग्राम के पिता रमेश गाडे ने भावुक शब्दों में कहा, मेरे बेटे की वजह से किसी को जीवनदान मिलेगा। शायद मैं उसे किसी और में देख पाऊंगा।

सड़क हादसे के बाद 'ब्रेन डेड'

जानकारी के अनुसार, 5 मार्च को पुणे जिले के जेजुरी में संग्राम गाडे का एक भीषण एक्सीडेंट हो गया था। इस दुर्घटना में संग्राम के सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। उसे तुरंत पुणे के सह्याद्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने आपातकालीन सर्जरी भी की। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संग्राम को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। यह खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पिता का जवाब सुनकर डॉक्टर हुए भावुक

पुणे में इलाज के बाद संग्राम को बीड के जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने उसके माता-पिता से अंगदान के विषय पर बातचीत की। जब डॉक्टरों ने पूछा, "क्या आप बेटे की आंखें दान कर सकते हैं?" तो पिता रमेश गाडे ने जो कहा उसने सबको निशब्द कर दिया।

रमेश गाडे ने रुंधे गले से कहा, "मेरे बेटे की सिर्फ आंखें ही क्यों, मेरा पूरा बेटा (शरीर) ले लो। जो शरीर मिट्टी में मिल जाना है, अगर वह किसी के काम आ सके, तो इससे बड़ा पुण्य और क्या होगा? मैं दिल पर पत्थर रखकर यह फैसला ले रहा हूं ताकि मेरे बेटे के कारण पांच लोगों को जीवन मिल सके। मैं अपने बेटे को किसी और के रूप में जीवित देखना चाहता हूं।"

पांच मरीजों को मिलेगा नया जीवन

संग्राम के माता-पिता के इस साहसी फैसले के बाद उसके अंग पांच अलग-अलग जरूरतमंद मरीजों को दान किए जाएंगे। इसके लिए बीड जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया तुरंत पूरी कर ली है।

पिता रमेश गाडे ने कहा, “मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन वह किसी के शरीर के अंगों के रूप में जीवित रहेगा।” गाडे परिवार के इस फैसले की सभी सराहना कर रहे हैं। लोग इसे मानवता और अंगदान के प्रति जागरूकता की प्रेरणादायक मिसाल बता रहे हैं।