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पहले समुद्र में दिखाया अपना दमखम, अब म्यूजियम में तब्दील होगा सेवानिवृत युद्धपोत आईएनएस विराट

कोकण के सिन्धुदुर्ग जिले के समुंदरी किनारे पट्टे से सात नॉटिकल माईन दूरी पर यह युद्धपोत कंक्रीट के खम्भे के सहारे स्थापित किया जाएगा...

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ins virat file photo

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(मुंबई): अंततः देश की सेना में गौरवशाली इतिहास रखने वाले सेवानिवृत युद्धपोत आईएनएस विराट को म्यूजियम बनाने का निर्णय राज्य सरकार ने ले लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गुरूवार की हुई मंत्रिमंडल की बैठक यह निर्णय लिया गया। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप योजना के तहत पहले चरण में 852 करोड़ रूपये खर्च कर आईएनएस विराट को म्यूजियम बनाया जाएगा।

कोकण के सिन्धुदुर्ग जिले के समुंदरी किनारे पट्टे से सात नॉटिकल माईन दूरी पर यह युद्धपोत कंक्रीट के खम्भे के सहारे स्थापित किया जाएगा। म्यूजियम में तब्दील हो रहे आईएनएस विराट से राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भरपूर अवसर होंगे। वही समुंदरी सुरक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, साहसिक खेल के लिए प्रशिक्षण आदि के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। आईएनएस विराट को म्यूजियम में तब्दील करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहले से विचारधीन था।


उल्लेखनीय है कि देश के इतिहास में इस लड़ाकू युद्धपोत का नाम सुनहरे अक्षरों से लिखा गया है। एक वर्ष पहले मार्च महीने में यह सेना में अपने बेहतरीन परफोर्मेंस के बाद सेवानिवृत हुआ है। अब इसे प्रेरणास्त्रोत बनाने के लिए सरकार ने म्यूजियम में बदलने का निर्णय लिया है। सिन्धुदुर्ग से 7 नॉटिकल माईन दूरी पर समुन्द्र में भरनी कर कंक्रीट के खम्भे खड़े किए, जिसके बीच इसे स्थापित किया जाएगा। पर्यटक आईएनएस विराट पर सैर का आनंद ले सकेंगे, साथ ही सेलिंग, स्काई डायव्हिंग जैसे आदि साहसी खेलों का भी रोमांच यहाँ देखने को मिलेगा।


ग्रेट ओल्ड लेडी नाम से मश्हूर हुआ था विराट

युवाओं को शिक्षित करने और इसे रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से समुंदरी प्रशिक्षण, मर्चेंट नेवी का प्रशिक्षण आदि कुछ निजी प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। एचएमएस हर्मीस के नाम से पहचाने जाने वाला यह पोत 1959 से ब्रिटेन की रॉयल नेवी की सेवा में था। 1980 के दशक में भारतीय नौसेना ने इसे साढ़े छह करोड़ डॉलर में खरीदा था और 12 मई 1987 को सेवा में शामिल किया। आईएनएस विराट का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है। ये दुनिया का एकलौता ऐसा जहाज है जो इतना बूढ़ा होने के बाद भी इस्तेमाल किया जा रहा था और बेहतर हालत में था। इसे ग्रेट ओल्ड लेडी के नाम से भी जाना जाता है।

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